संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मंडियों में 1509 किस्म की धान के दामों में अचानक आई गिरावट ने किसानों को चिंतित कर दिया है। शनिवार को 1509 धान के दाम में 200 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई। इस कारण किसानों के चेहरे पर मायूसी छा गई। दो दिन पहले तक जो 1509 किस्म की धान 4150 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर पहुंच गई थी, उसके दाम अब घटकर 3950 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गए हैं।
किसानों में दिलबाग, सुखदेव, सुरेश व कर्मा का कहना है कि डीजल, खाद, बीज और मजदूरी की बढ़ती लागत के बीच अगर धान के दाम इसी तरह गिरते रहे, तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। दामों में गिरावट के बावजूद मंडियों में धान लेकर पहुंचने वाले किसानों का तांता लगा हुआ है। अब तक मंडियों में करीब 6 हजार क्विंटल धान पहुंच चुकी है और आने वाले दिनों में इसकी आवक और तेज होने की उम्मीद है।
नमी का स्तर 25 से 27 प्रतिशत तक
इस बार फसल में नमी की मात्रा एक बड़ी समस्या बनकर उभर रही है। वर्तमान में मंडी में आ रही धान में नमी का स्तर 25 से 27 प्रतिशत तक दर्ज किया जा रहा है। नियमानुसार धान को सुखाकर लाने की हिदायत दी जाती है, लेकिन कई बार मौसम की अनिश्चितता और जल्दबाजी के कारण किसान अत्यधिक नमी वाली फसल ही मंडी लेकर पहुंच रहे हैं, जो दामों में कमी का एक मुख्य कारण माना जा रहा है।
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सुविधाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
एक तरफ जहां किसान दामों की मार झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मंडियों की बदइंतजामी ने उनकी दिक्कतों को दोगुना कर दिया है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा मंडियों में पुख्ता व्यवस्था करने के बड़े-बड़े दावे तो किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। मंडियों में सुविधाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। न तो किसानों के बैठने के लिए उचित व्यवस्था है और न ही सफाई के कोई ठोस प्रबंध दिखाई दे रहा है। किसानों ने मांग की है कि मंडी परिसरों में मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त करवाई जाए।
मंडी में करीब छह हजार क्विंटल तक धान की आवक हो गई है। धान निरंतर पहुंच रहा है। किसानों को हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। - नरेंद्र ढुल, सचिव, मार्केट कमेटी