अंबाला। नगर परिषद प्रशासन और मांगों के समर्थन में हड़ताल पर अड़े सफाई कर्मचारियों व सीवरमैनों के बीच तनातनी चरम पर पहुंच गई है। प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए काम पर न लौटने वाले लगभग 150 कर्मचारियों को अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर सेवा समाप्ति की चेतावनी दी है।
दूसरी ओर, प्रशासनिक कार्रवाई से भड़के कर्मचारियों ने इस नोटिस को स्वीकार करने से साफ इन्कार कर दिया और मंगलवार को जब मुख्य सफाई निरीक्षक उन्हें यह नोटिस थमाने धरना स्थल पर पहुंचे, तो हड़ताली कर्मियों ने सरकार और नगर परिषद अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उन्हें बैरंग लौटा दिया।
3 दिन में ड्यूटी पर न लौटने पर सेवा समाप्त करने की चेतावनी
नगर परिषद की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि सफाई व्यवस्था अति-आवश्यक सेवा के अंतर्गत आती है। 6 अगस्त से बिना किसी पूर्व सूचना के लगातार अनुपस्थित रहने और हड़ताल में शामिल होने के कारण शहर में बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। नोटिस में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के 18 अगस्त 2026 के आदेशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यदि कर्मचारी 3 दिन के भीतर ड्यूटी पर उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं करते तो नियमानुसार उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाएंगी।
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कर्मचारियों की आवाज दबाने का प्रयास : यूनियन
विभिन्न मांगों के समर्थन में आंदोलनरत नगर पालिका कर्मचारी संघ के पदाधिकारी सेवाराम बोहत, वीरपाल कांगड़ा और पापिंदर सिंह ने बताया कि प्रशासन दमनकारी नीतियां अपनाकर कर्मचारियों की आवाज दबाने का प्रयास कर रहा है लेकिन कोई भी कर्मचारी नोटिस के दबाव या कार्रवाई की धमकी से डरने वाला नहीं है। जब तक उनकी सभी लंबित मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक हड़ताल इसी तरह जारी रहेगी।
छावनी की सड़कों पर 50 टन कचरा
18 अगस्त से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण छावनी की सड़कों पर करीब 50 टन कचरा फैला हुआ है। बीते दिनों हुई बारिश के कारण कचरा सड़ रहा है जिससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। छावनी से रोजाना करीब 110 टन कचरा निकलता है।