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Ambala News: एनआईसीयू वार्ड में 15 की जरूरत, आठ कर्मचारी ही तैनात

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सिटी के नागरिक अस्पताल में मौजूद निक्कू वार्ड। संवाद
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अंबाला सिटी। नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत दावों से इतर है। अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई यानी निक्कू वार्ड में इस समय स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। आलम यह है कि केवल 8 कर्मचारियों के भरोसे पूरे वार्ड की जिम्मेदारी चल रही है, जिससे स्टाफ पर लगातार अत्यधिक कार्यभार का दबाव महसूस करता है। यहां कम से कम 15 कर्मचारियों की जरूरत है।
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नागरिक अस्पताल के इस निक्कू वार्ड में रोजाना औसतन 20 से 22 नवजात शिशु इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से कई बच्चे ऐसे होते हैं जिनकी हालत बेहद नाजुक और गंभीर होती है। अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बताया कि वार्ड में आने वाले अत्यधिक गंभीर बच्चों को जीवन बचाने के लिए तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ता है।
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अभी दो वेंटिलेटर, दो और के लिए भेजा गया आवेदन
वर्तमान में अस्पताल के पास नवजातों के इलाज के लिए केवल दो ही वेंटिलेटर मशीनें उपलब्ध हैं। गंभीर मामलों की संख्या अधिक होने के कारण इन दो मशीनों पर बहुत अधिक दबाव रहता है। हालांकि, स्थिति की नजाकत को समझते हुए और बच्चों के बेहतर इलाज को सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल प्रशासन की ओर से दो और नई वेंटिलेटर मशीनों की मांग का आवेदन उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही नए वेंटिलेटर मिलने से कुछ राहत मिल सकेगी।
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कम गंभीर बच्चों का सी-पैप मशीन से चल रहा इलाज
निक्कू वार्ड में वेंटिलेटर की सीमित संख्या को देखते हुए डॉक्टरों द्वारा बेहद सूझबूझ से काम लिया जा रहा है। जिन नवजात शिशुओं की हालत थोड़ी कम गंभीर होती है या जिन्हें शुरुआती सांस की तकलीफ होती है, उन्हें वेंटिलेटर के बजाय सी-पैप मशीन पर रखा जाता है। इसके जरिए बच्चों को कृत्रिम सांस देकर स्थिर किया जाता है, ताकि गंभीर रूप से बीमार बच्चों के लिए वेंटिलेटर खाली मिल सके।
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स्वास्थ्य सुविधाओं को विस्तार देने की सख्त जरूरत
अंबाला छावनी और शहर के आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग अपने नवजात बच्चों को लेकर नागरिक अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में, यदि जल्द ही निक्कू वार्ड को पर्याप्त संख्या में स्टाफ और आधुनिक मेडिकल उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए, तो मरीजों के परिजनों और अस्पताल प्रशासन दोनों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द निक्कू वार्ड में स्टाफ की कमी को दूर किया जाए और वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि किसी भी नवजात की जान खतरे में न पड़े।
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