अंबाला। छह माह में ट्रेन नंबर 15211 जननायक और 12407 कर्मभूमि एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की ट्रेनों से 145 बच्चों को रेस्क्यू किया गया है। तस्करों का गिरोह इन बच्चों को उनके अभिभावकों के सामने अच्छी कमाई का लालच देकर चंगुल में फंसा रहा है। बच्चों को कारखानों और खेतों में मजदूरी के दलदल में धकेला जा रहा है। अब इस संगठित अपराध को जड़ से खत्म करने के लिए जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन अलायंस और जिला विकास संगठन ने योजना तैयार की है।
पिछले कुछ मामलों में की गई पड़ताल से सामने आया है कि तस्कर अब कक्षा 8 से 10वीं तक के बच्चों को विशेष रूप से निशाना बना रहे हैं। तस्कर पहले अभिभावकों को भरोसे में लेते हैं और उन्हें बच्चों के सुनहरे भविष्य व मोटी कमाई का सपना दिखाते हैं। एक बार झांसे में आने के बाद बच्चों को पंजाब सहित हिमाचल ले जाकर कारखानों और खेतों में बंधुआ मजदूरी के लिए मजबूर कर दिया जाता है। जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन अलायंस और जिला विकास संगठन ने एक साझा रणनीति तैयार की है। बिहार और उत्तर प्रदेश तस्करी के सबसे बड़े स्रोत राज्य माने जाते हैं। संवाद