रोजगार मेले में 1825 को मिला नियुक्ति पत्र, किसी को मिला तीन लाख का पैकेज तो किसी ने जताई
अमर उजाला ब्यूरो
नारायणगढ़। राजकीय कालेज में आयोजित दो दिवसीय महारोजगार मेले में 80 कंपनियों ने भाग लिया और 4145 प्रार्थियों का पंजीकरण किया गया, जिसमें से 1825 को मौके पर ही नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। यह जानकारी श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री नायब सिंह सैनी ने महारोजगार मेले के समापन अवसर पर मीडिया से वार्ता में दी।
उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों में खर्ची और पर्ची चलती थी जबकि वर्तमान सरकार में पारदर्शी तरीके से योग्यता के आधार पर युवाओं को नौकरियां मिल रही हैं। सरकारी सेक्टर में लगभग 61 हजार युवाओं को नौकरी वर्तमान सरकार में लगी है तथा 113 रोजगार मेलों एवं हाल ही में करनाल, पलवल तथा नारायणगढ़ में आयोजित किये गये महारोजगार मेलों से भी लगभग 50 हजार युवाओं को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी मिली है। इसके अलावा केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में भी प्रदेश के युवाओं को नौकरी मिली है। उन्होंने कहा कि सक्षम युवा योजना में पोस्ट ग्रेजुएट को 9 हजार तथा ग्रेजुएट को साढे़ सात हजार का मानदेय दिया जा रहा है। इस अवसर पर नव ज्योति एजेंसी के डायरेक्टर गुरशरण खुराना ने कहा कि नव चयनित युवाओं से कंपनी का अगले तीन महीनों तक समन्वय रहेगा और उनकी किसी प्रकार की दिक्कत को दूर किया जाएगा।
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किसी को तीन लाख का पैकेज तो किसी ने जताई निराशा
महारोजगार मेेले में कीर्ति राणा को मैनेजमेंट ट्रेनी में तीन लाख का पैकज मिला है। इसी प्रकार जेन पैक कंपनी में कृष्णा को 2.2 लाख और चाहत को आईसीआईसीआई बैंक में 2.4 लाख का पैकेज मिला है। महारोजगार मेले में नौकरी के लिए चयनित हुए युवाओं के चेहरे पर एक अलग ही खुशी थी।
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नौकरी मिलती है पर कम सैलरी मिलती है
गांव छप्पर के विक्रम सैनी ने बताया कि उसने अच्छे मार्क से आईटीआई की हुई है। इस तरह के रोजगार मेलों में दो बार भाग ले चुका हूं, लेकिन जिस कंपनी में नौकरी मिलती है, उसमें वेतन कम मिलता है। इस रोजगार मेलों से हमें लाभ ही नहीं मिल रहा। सरकार से मांग है कि सैलरी कम से कम 15 हजार से ऊपर हो। आज के समय में कम सैलरी से गुजारा करना मुश्किल हो गया है।
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न ही कोई भत्ता मिलता है और न ही नौकरी मिली
साढ़ौरा का दिव्यांग दीपक कुमार का कहना था कि इस तरह के रोजगार मेले में कई बार ले चुका हूं। मेरे पास नवज्योति से ट्रेनिंग का भी फार्म है। मेरे घर में मेरे सिवाय कोई और कमाने वाला नहीं है। मेरे पिता बीमार रहते हैं और मैं अपाहिज हूं। मैंने दसवीं की हुई है। न तो मेरे को अपाहिज का सरकार कुछ देती है और न ही मेरे को कहीं नौकरी मिलती है।