अंबाला सिटी। शहरों को स्वच्छ बनाने के लिए सरकार ने शहर के बीचों-बीच चल रही डेयरियों को बाहर निकाल दिया गया। डेयरी संचालकों को डेयरियों के लिए वर्ष 2004 में गांव कांवला में 74 कनाल 17 मरले जमीन भी अलॉट कर दी गई, लेकिन 15 साल बीत जाने के बावजूद डेयरी संचालकों की रजिस्ट्रियां लंबित पड़ी हैं। इसके चलते डेयरी संचालकों में दिन-प्रतिदिन रोष बढ़ता जा रहा है।
डेयरी संचालकों के संरंक्षक ऋषि पाल ने बताया कि जमीन अलॉट करने के तीन साल बाद उन्होंने उक्त जमीन पर कब्जा लिया। लेकिन, जैसे ही उन्होंने अपनी डेयरियों के निर्माण का कार्य शुरू करना चाहा तो 2009 में हुडा ने एक्वायर कर ली थी, जिसके बाद अब तक यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ऋषि पाल ने बताया कि 2014 में तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी डीसी को रजिस्ट्रियां करवाने के आदेश दिए थे, जिसको लेकर डीसी ने मुख्य सचिव को पत्र भी लिखा था। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी मामले को 30 अप्रैल 2017 को सीएम मनोहर लाल के सामने भी रखा गया था। उन्होंने भी इसे गंभीरता से लेते हुए डीसी को मामला निपटाने के आदेश दिए थे। हुडा के एक्जीक्यूटिव ऑफिसर ने 24 अगस्त 2018 को मुख्य अधिशासी को पत्र लिखकर पूरे मामले का हवाला दिया था। लेकिन, उसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। डेयरी संचालकों को मजबूरन कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। ऋषि पाल ने कहा कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह नगर-निगम व हुड्डा के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे।