दस दिनों तक दिया सरकार का साथ, हड़ताल खत्म होते ही रोडवेज ने निकाला कांट्रेक्ट पर रखे चालक-परिचालकों को
प्रस्तावित लीड
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फोटो नंबर : 3, 4 व 39
कांट्रेक्ट पर रखे 250 चालक-परिचालकों ने कैंट बस स्टैंड पर जताया रोष
बसों की चाबियां वर्कशॉप में जमा करवाईं
अंबाला डिपो के सस्पेंड किए गए 58 कर्मियों को किया गया बहाल
पुराने ड्राइवरों ने संभाली बसें, सभी बसें चली शनिवार को
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट/सिटी। आखिर वही हुआ जिसका भय कांट्रेक्ट पर रोडवेज द्वारा रखे गए चालकों-परिचालकों को था। 18वें दिन हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हुई रोडवेज की हड़ताल के बाद शनिवार को सभी रोडवेज कर्मी ड्यूटी पर लौट आए। हड़ताल के दौरान रोडवेज ने कांट्रेक्ट पर जिले में रखे करीब ढाई सौ चालकों-परिचालकों के हाथों में बसें थमा रखी थीं, मगर पक्के कर्मियों के लौटते ही एक ही झटके में इन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। सिटी रोडवेज वर्कशॉप में शनिवार सुबह उनसे बसों की चाबियां ले ली गईं। परेशान चालक-परिचालक रोडवेज में भर्ती होने का ख्वाब लेकर आए थे। उनका कहना था कि उन्होंने सरकार का मुश्किल समय में सहयोग दिया लेकिन सरकार का अपना काम निकलते ही उन्हें अब बाहर कर दिया है। कैंट बस स्टैंड पर दोपहर इकट्ठा हुए कांट्रेक्ट पर रखे चालकों व परिचालकों ने रोष जताया। वह रोडवेज जीएम से भी मिलने के लिए गए, मगर अवकाश के होते वह नहीं मिल सके। दूसरी ओर हड़ताल के दौरान अंबाला डिपो के सस्पेंड किए गए 58 कर्मियों को भी बहाल कर दिया गया है और शनिवार से ही सभी कर्मचारी ड्यूटी पर लौट आए हैं।
बस स्टैंड पर जताया रोष
कैंट बस स्टैंड पर दोपहर को इकट्ठा हुए कांट्रेक्ट पर रखे गए चालक व परिचालक कृष्ण कुमार, गुरमीत सिंह, बनारसी दास, साहिब सिंह, जितेंद्र कुमार, दिलेर सिंह ने बताया कि वह प्राइवेट नौकरी करते हैं और यह सोचकर रोडवेज में भर्ती हुए थे कि उन्हें सरकारी नौकरी मिल जाएगी, मगर यहां तो सरकार व रोडवेज विभाग ने अपना काम पूरा होते ही उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया है। उन्होंने कहा कि वह नौकरियां छोड़कर 10 से 15 दिन तक रोडवेज में अपनी सेवाएं देते रहे। अब वह वापस किस मुंह से प्राइवेट नौकरियों पर जाएंगे। अभी तक उन्हें रोडवेज बसें चलाने का कोई मेहनताना भी नहीं मिला है। प्रतिदिन क्या दिहाड़ी मिलेगी यह भी पता नहीं है जबकि ठेकेदार उनसे कितने रुपये लेगा यह भी नहीं पता। परेशान चालक व परिचालक स्थायी तौर पर नौकरी की मांग को लेकर रोडवेज जीएम से भी मिलने पहुंचे, मगर वह नहीं मिले।
दो घंटे बाद दाखिल हुए वर्कशॉप में
हड़ताल खत्म होने पर सुबह से ही रोडवेज ड्राइवर व कंडक्टर बसों के इंतजार में वर्कशॉप के बाहर खड़े थे लेकिन कर्मचारियों के न होने के कारण उन्हें लगभग दो घंटे तक गेट पर ही खड़ा होना पड़ा। इस दौरान कुछ कर्मचारियों ने नारे लगाने शुरू कर दिए। लगभग 10 बजे ड्राइवर व कंडक्टर को बसें सौंप दी गईं तथा उन्हें विभिन्न रूटों पर भेज दिया गया। रोडवेज यूनियन प्रधान रमन सैनी ने बताया कि सुबह तालमेल कमेटी की गेट मीटिंग हुई जिसमें कर्मचारियों को हाईकोर्ट के निर्णय के बारे में अवगत करवाया गया और उन्हें बताया गया कि वह अपनी ड्यूटी ज्वाइन करें। साथ ही यह भी कहा गया कि 12 नवंबर को सरकार के साथ जो बैठक होनी है उसमें समस्याओं का निदान हो। सस्पेंड किए गए 58 कर्मियों ने भी ड्यूटी ज्वाइन कर ली है जबकि जेल से भी सभी कर्मचारी छूट चुके हैं।
कोट्स
शनिवार हड़ताल खत्म होने पर सभी चालक व परिचालक ड्यूटी पर आ गए हैं और उन्हें बसें सुपुर्द की गई हैं। कांट्रेक्ट पर रखे चालक व परिचालक आए थे जिसके बाद उन्हें जीएम से मिलने को कहा गया है।
-राम रतन, अधीक्षक, बस स्टैंड, अंबाला कैंट।