गांधी जयंती तक मिलेगा हिम्मतपुरा के निवासियों को पानी
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। आजादी के बाद पहली बार अब हिम्मतपुरा व अन्य कॉलोनियों के निवासियों के घर पानी की सीधी सप्लाई होगी। गांधी जयंती तक घर-घर पानी पहुंच जाएगा। वीरवार को इस कार्य के लिए स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज ने हिम्मतपुरा में ट्यूबवेल निर्माण का शिलान्यास किया। हिम्मतपुरा के साथ-साथ अब गुलाब मंडी व दुधला मंडी के लोगों की पेयजल आपूर्ति की मांग भी पूरी हो सकेगी। विज ने कैंटोनमेंट बोर्ड के तहत आने वाले इलाके में लगाए जाने वाले ट्यूबवेल का शिलान्यास किया और जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आदेश दिए कि वह आज ही ट्यूबवेल के बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करें ताकि दो अक्तूबर गांधी जयंती पर इस इलाके के लोगों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति हो। मौके पर सीईओ वरुण कालिया, उपाध्यक्ष अजय बवेजा, पार्षद सन्नी, राजू बाली, आशीमा, लक्ष्मी देवी आदि मौजूद रहे।
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रक्षा मंत्रालय से जमीन मिलने पर लगाया ट्यूबवेल
अनिल विज ने कहा कि रेलवे कॉलोनी के साथ सटा होने और कैंटोनमेंट बोर्ड के तहत आने की वजह से इस इलाके की दोनों ओर से अनदेखी की गई। भाजपा के राज में विकास के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है लेकिन यहां पर ट्यूबवेल लगाने के लिए जमीन का न मिल पाना एक बड़ी वजह रही। ट्यूबवेल लगाने के लिए रक्षा मंत्रालय से गुहार लगाई गई और जमीन मिलते ही हरियाणा सरकार ने यहां ट्यूबवेल लगाने के लिए 23 लाख की राशि को स्वीकृति प्रदान कर दी ताकि लोगों को स्वच्छ पेयजल मिल सके। कैबिनेट मंत्री ने बताया की अगले माह तक ट्यूबवेल बनकर तैयार हो जाएगा। हिम्मतपुरा के हर घर को स्वच्छ पेयजल के कनेक्शन दिए जाएंगे। गुलाब मंडी व दुधला मंडी के लोगों को इसका लाभ मिलेगा।
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क्षेत्र में विकास की एक ईंट नहीं लगाई कांग्रेस ने : विज
अनिल विज ने कहा कि चंद्रपुरी, शाहपुर और मच्छौंडा इलाका हलका नग्गल के अंतर्गत आते थे। नग्गल के टूट जाने के बाद इस इलाके को छावनी में शामिल किया गया। नग्गल के विधायक ने अपने कांग्रेस शासनकाल के दस वर्ष में विकास की एक ईंट नहीं लगाई और न ही उनकी बेटी जो बीते पांच साल पार्षद रही हैं, ने इस इलाके के विकास के लिए कोई काम किया। मंत्री ने कहा कि जनता के विकास के लिए न तो इन कांग्रेसियों ने कभी कोशिश की और न ही उनमें काम करने की संस्कृति है। उन्होंने कहा पिछली सरकार के समय केंद्र से एक रुपया जारी होता था लेकिन धरातल तक पहुंचते-पहुंचते केवल 15 पैसे ही विकास में लग पाते थे।