सैकड़ों घरों मेें घुसा पानी, रात भर जागते रहे लोग, दिन में सामान समेटते नजर आए
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- पहाड़ों पर हुई बरसात ने टांगरी से छुड़ाए अपनों के आशियाने
सैकड़ों घरों मेें घुसा पानी, रात भर जागते रहे लोग, दिन में सामान समेटते नजर आए
- शनिवार देररात अचानक बड़े टांगरी के जल स्तर ने बढ़ाई इलाका वासियों की मुश्किल
- रात के अंधेरे में घरों के अंदर घुसे पानी से मचा हड़कंप, भगदड़ में लोग चोटिल
- प्रशासनिक मदद के इंतजार में लोगों की छुटी आस, खुद ही बनाई व्यवस्था
20 अगस्त
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। पहाड़ी इलाकों में हुई बरसात के बाद टांगरी नदी का जलस्तर शनिवार देररात अचानक बढने से सैंकड़ों परिवारों के मुसिबत खड़ी हो गई। अचानक बढ़े जलस्तर ने देखते ही देखते हुए सैंकड़ों मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। जैसे ही जलस्तर बढने की सूचना इलाकावासियों को लगी तो हड़कंप मच गया और आनन-फानन में लोग मकानों से सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने लगे। रविवार अलसुबह जलस्तर कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली। लोगों ने अपने घरों में वापिस जाकर हालात का जायजा लिया। इस माहौल से ये तो साफ जाहिर होता है कि प्रशासन द्वारा बाढ़ को लेकर किए गए लाख बंदोबस्त देररात आए पानी के साथ ही बह गए। पानी के बीच फंसे लोग रातभर प्रशासनिक अधिकारियों से मदद मिलने की उम्मीद लगाएं बैठे रहे। प्रशासन केवल मुनादी कर ही अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ता दिखाई दिया।
आंखों के सामने ही बह गया सामान, बेबस रहे लोग
टांगरी नदी में पहले तो पानी ज्यादा मात्रा में न होने से लोग थोड़ी राहत महसूस कर रहे थे। शनिवार दस बजे के बाद बढ़े जलस्तर ने इलाकावासियों के होश उड़ा दिए। अचानक जलस्तर बढने से लोगों को सामान समेटने तक का मौका नहीं मिला। जो व्यक्ति जिस तरह था, वैसे ही कुछ सामान को लेकर बाहर की ओर भागने लगा। टांगरी की ठीक जद में बसे मकानों के हालात तो ये थे कि लोग घरों की छतों पर जमा हो गए और उनका सामान आंखों के सामने ही पानी के तेज बहाव के साथ बह गया। इलाकावासी सुमन रानी, अजय, राजू, मोनू का कहना है कि अचानक पानी आने से वह पूरी तरह से बेखर थे। पानी के बीच उनका घरेलू सामान भी बह गया
डर में लोगों ने गुजारी रात
जलस्तर बढने से लोग बुरी तरह से घबरा गए। प्रशासन द्वारा उन्हें कई बार मुनादी करवाकर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई थी,जबकि उसके बावजूद लोग अपने मकानों को लावारिस हालात में छोड़कर जाने को तैयार नहीं हुए। यह सभी टांगरी बांध पर ही डेरा डाल कर रात भर जागते रहे। टांगरी में पानी आने की खबर के दौरान कुछ लोग भगदड़ के दौरान घायल हो भी गए। मामूली चोटें आने के कारण उनकी हालात सामान्य थी।
समाजसेवी से संस्थाओं ने संभाला मोर्चा, मदद को बढ़ाये हाथ
टांगरी में बसे लोगों को दर्द को भले ही प्रशासन नहीं समझ सका, लेकिन समाजसेवी संस्थाओं ने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।एमएसजी की टीम, हैल्पिंग-पीपुल पानी के अंदर ही लोगों पर पहुंची और उनकी हरसंभव मदद की, जबकि उन्हें पानी से निकलने के बाद भी उनके खाने की व्यवस्था करते हुए दिखाई दे रहे थे। रविवार अलसुबह पानी का स्तर थोड़ा कम होने पर उनके लिए नाश्ते की व्यवस्था की। कई रिहायशी इलाके में बसे समाजसेवी लोग तो टांगरी वासियों की मदद के लिए अपने घरों से ही खाना तैयार करवाकर बच्चों, महिलाओं, पुरुषों व बुजुर्गों का पेट भरते हुए दिखाई दे रहे थे। वार्ड नंबर 18 के पार्षद परविंद्र परी ने भी खाना वितरित किया। जबकि प्रशासन ने भी रविवार टांगरी के अंदर बसे लोगों के लिए खाने की व्यवस्था की।
खौफनाक था घरों में पानी घुसने का मंजर
देररात बढ़े जलस्तर से नदी के किनारे बसे घरों में पानी घुस आया। पानी का स्तर इतना बढ़ गया था कि टांगरी के अंदर बसी जिन कालोनियों में पानी नहीं आता था, वहां भी कई-कई फुट पानी घरों के अंदर मौजूद था। न्यू टैगोर गार्डन व अन्य इलाके में बसे योगेश, निर्मला देवी, मोना चौहान, कनिका चौहान का कहना है कि वह मंजर याद करते ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं। इलाके में बिजली गुल होने से चारों ओर अंधेरा पसरा हुआ था और वह मकानों में मोमबत्तियां लगाकर खाना बनाने की तैयार कर रहे थे। लोगों का शोर कानों तक पहुंचा कि भागो-भागो टांगरी का जलस्तर बढ़ रहा है। इतने में वह कुछ समझ पाते कि पानी घरों में दाखिल हो गया।
बिना ऑपरेटर के दी बड़ी लाइट, एसडीएम भड़के
टांगरी के हालातों का जायजा लेने के लिए पहुंची एसडीएम सुभाष अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने संबंधित विभाग से जायजा लेने के लिए वैकल्पिक लाइटें उपलब्ध करवाने की मांग की तो विभाग ने कई घंटों के बाद लाइट तो भेजी, लेकिन यह लाइट इतनी बड़ी थी कि इस लाइट को उठा मुश्किल था और आपरेटर को साथ भेजा ही विभाग भूल गया। एसडीएम ने जब लाइट को देखा तो वह भड़क गए। संबंधित अधिकारियों की जमकर क्लास भी लगाई।
अजीत नगर बांध पड़ा छोटा, बढ़ते जलस्तर से फूली सांसें
टांगरी बांध में बढ़ते जलस्तर से टांगरी के अंदर बसे लोगों की सांसे फूली हुई थीं, वहीं अजीत नगर के निकट बसी रिहायशी कालोनीवासी बांध में उंचाई छोटी होने के कारण असमंजस की स्थिति में फस गए थे। टांगरी बांध इतना छोटा था कि महज दो फुट और पानी आने से टांगरी का पानी कालोनियों में प्रवेश कर जाता है। आनन-फानन में इलाकावासियों ने प्रशासन को सूचित किया। प्रशासन ने भी महज खानापूर्ति करते हुए कुछ गार्ड को मौका पर तैनात कर स्थिति का जायजा लेने की ड्यूटी लगा थी। गनीमत ये रही कि सही समय पर पानी का स्तर कम होने लगा, वरना रिहायशी इलाकों में भी बाढ़ के हालात पैदा हो सकते थे। हैरानी की बात यह है कि एक ओर प्रशासन बाढ़ को लेकर दावे कर रहा है, वहीं टांगरी बांध के निचले किनारों को ही ठीक करना भूल गया। अगर ये ही हालात रहे तो टांगरी में दोबार बढ़े जलस्तर से मुश्बित खड़ी हो सकती है।
टांगरी बांध व अन्य इलाकों में स्थिति का जायजा लिया गया था, अलसुबह एक बजे के करीब पानी की जलस्तर घटना शुरू हो गया था,लोगों की मदद के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारियां कर रखी थी। फिलहाल टांगरी के हालात सामान्य है’
- सुभाष सिहाग, एसडीएम, अंबाला कैंट