अंबाला कैंट। हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के अनुदान प्राप्त विद्यालयों से संबद्ध हरियाणा स्वैच्छिक राज्य शिक्षा सेवा नियम-2017 पर मोहर लगाते ही प्रदेश के 204 एडिड स्कूलों का अस्तित्व इतिहास के पन्नों पर सिमट गया है।
हरियाणा प्रदेश अनुदान प्राप्त विद्यालय अध्यापक संघ के पूर्व प्रदेश महामंत्री व प्रिंसिपल रमेश बंसल ने कहा एडिड स्कूलों के बारे में जो पूर्व में हुड्डा सरकार नहीं कर पाई थी, वर्तमान में मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने कर दिखाया है वास्तव में यह एक ऐतिहासिक फैसला है और वर्तमान सरकार इसके लिए बधाई की पात्र है। इस निर्णय से जहां सैकड़ों शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों को आर्थिक शोषण से मुक्ति मिलेगी वहीं संबद्ध विद्यालय प्रबंधन समितियां भारी आर्थिक बोझ से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से शिक्षा जगत में अपना महत्वपूर्ण योगदान जारी रख सकेगी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामभज सिंह ने बताया कि प्रदेश के एडिड स्कूलों के शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों को सरकारी सेवा में समायोजित करने संबंधी प्रक्रिया वर्ष 2011 में नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में आयोजित एक प्रदेशस्तरीय बैठक में एक बीज के रूप में रोपित की गई थी। प्रदेश के 204 एडिड विद्यालय उन हजारों निजी विद्यालयों की श्रेणी में शामिल हो कर गैर अनुदान प्राप्त विद्यालय कहलाएंगे और इन विद्यालयों में सभी शिक्षिकों व अन्य कर्मचारियों के पद गैर अनुदानित होंगे। एडिड स्कूलों को मिलने वाली 75 प्रतिशत अनुदान राशिबंद हो जायेगी। पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष महिंद्र सिंह रावत ने इस निर्णय के उस अंश का भी स्वागत किया है जिसके तहत संबद्ध प्रबंधक समितियां विद्यालय-भवन व भूमि के वाणिज्यक इस्तेमाल के लिए स्कूल बंद नहीं कर पाएंगी बल्कि यह विद्यालय यथावत कार्य करते रहेंगे। उल्लंघन करने की स्थिति में कड़े नियमों का प्रावधान किया गया है। साथ ही राजकीय विद्यालयों को अच्छे शिक्षक मिलेंगे। ऐसी संभावनाएं भी व्यक्त की जा रही है।
जिले में 34 स्कूलों में 500 से अधिक स्टाफ को फायदा
जिले में इस समय 34 स्कूलों में पांच सौ से अधिक स्टाफ है। सरकार नोटिफिकेशन जारी कर सभी एडिड स्कूल को टेकओवर करेगी। एडिड स्कूलों के टीचिंग व नॉन टीचिंग स्टाफ को भी सरकार टेकओवर करेगी। रमेश बंसल ने बताया कि स्टाफ को अब मेडिकल सुविधा मिलेगी, सैलेरी समय पर आएगी। उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट की मनमानि खत्म होगी। कई मैनेजमेंट आर्थिक तौर पर कमजोर होने के कारण स्टाफ को समय पर सैलेरी नहीं मिलती थी, मगर अब ऐसा नहीं होगा।