अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। राजकीय स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड डे मील के बिल देने पर पर शिक्षक संघ ने एतराज जताया है। हर माह इसी में काफी समय बर्बाद होता है, जबकि अन्य कार्य भी शिक्षकों के जिम्मे लगाए गए हैं, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। यह स्थिति काफी समय से बनी हुई है, जबकि इस मामले में शिक्षक संघ इसे बदलने की मांग उठा रहा है ।
यह है स्थिति
जिला अंबाला में राजकीय प्राथमिक विद्यालयों की संख्या करीब 730 (सरकारी व एडेड) हैं, जबकि मिड डे मील पहली से आठवीं कक्षा तक दिया जाता है। इन बच्चों को सप्ताह में हर दिन अलग मेन्यू के हिसाब से मिड डे मील दिया जाता है। इसके बाद इन स्कूलों में टीचर्स को इसके लिए हर माह बिल एकत्रित करने पड़ते हैं। इन्हीं बिलों को एकत्रित करने में टीचर्स के पसीने छूट रहे हैं। इसी पर शिक्षक संघ ने अपना एतराज जताया है और इसे बंद करने की मांग उठाई है।
यह व्यवस्था बने तो मिले राहत
शिक्षक संघ की मानें, तो पहले मिड डे मील के बिल नहीं मांगे जाते थे, जबकि विभाग खुद ही यह परचेज कर स्कूलों को देता था। लेकिन बाद में व्यवस्था बदली, जिसने शिक्षकों का कार्य भार बढ़ा दिया। अब हालात यह हैं कि हर महीने कम से कम दो दिन तो इसी में बर्बाद हो जाते हैं, जबकि सरकार शिक्षण कार्य सहित अन्य जिम्मेदारियां भी शिक्षकों पर लाद रही है। एक तय राशि से अधिक निकाल नहीं सकते, तो फिर क्यों शिक्षकों को मिड डे मील के बिलों में उलझाया जा रहा है। आडिट के दौरान यह बिल पेश करने अनिवार्य हैं, जबकि खरीदे गए सामान के बिल लेने में कई बाद दुकानदार भी आनाकानी करते हैं और इसी कारण से समय भी बर्बाद होता है।
यदि सरकार इस मामले में यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट मांग ले, तो काफी राहत मिल सकती है। अध्यापकों पर पहले ही कार्यभार अधिक है, जबकि बिल इकठ्ठा करने में कई दिन बर्बाद हो जाते हैं। इसी को लेकर शिक्षक संघ जल्द ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने अपनी मांग रखेगा।
- तरविंदर शर्मा, ब्लाक पे्रजीडेंट राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ