संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। विश्व धरोहर कालका-शिमला रेल खंड पर 122 वर्ष पुराना भाप इंजन दौड़ता हुआ नजर आएगा। अंबाला रेल मंडल के प्रबंधक ने इसका प्रस्ताव तैयार किया है। कालका रेलवे स्टेशन के शेड में रखे भाप इंजन की खामियों को दूर करने के लिए इसे रेवाड़ी भेजा जाएगा, वहीं सहारनपुर से आई रेलवे की तकनीकी टीम ने भी इंजन की खामियों को दूर करना शुरू कर दिया है, हालांकि रेवाड़ी पहुंचने के बाद इसका पुन: परीक्षण किया जाएगा। डीआरएम विनोद भाटिया ने बताया कि भाप इंजन को रेल सहित सड़क मार्ग से रेवाड़ी भेजने की तैयार की जा रही है। जल्द इसका संचालन किया जाएगा।
यादें होंगी ताजा
अंग्रेजों के जमाने के भाप इंजन को देखने और ट्रेन में सफर करने के लिए प्रत्येक वर्ष सैकड़ों की संख्या में विदेशी सैलानी आते हैं। इसलिए नववर्ष पर जनवरी माह में भाप इंजन से लैस ट्रेन को कालका-शिमला रेल खंड पर संचालित करने की योजना है। इससे पहले रेल खंड पर मुख्य सुरक्षा आयुक्त और अन्य विभागीय अधिकारियों की निगरानी में इसका परीक्षण भी किया जाएगा, इसके बाद किराए व समय सारिणी का निर्धारण करके इसे रेलवे की वेबसाइट पर अपडेट कर दिया जाएगा ताकि विदेशी सैलानियों तक इसकी जानकारी पहुंच सके।
2018 के बाद नहीं हुआ संचालन
वर्ष 2018 में अंतिम बार भाप इंजन का संचालन कालका-शिमला रेल खंड पर किया गया था। इसके बाद भाप इंजन का संचालन नहीं हो पाया, हालांकि कई बार इसे बीच-बीच में स्थानीय स्तर पर चलाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन कभी मौसम खराब होने के चलते तो कभी तकनीकी खराबी के कारण भाप इंजन वापस विश्व धरोहर रेल खंड पर नहीं दौड़ पाया और न ही पूर्व के किसी भी मंडल रेल प्रबंधक ने इसके संचालन में रुचि दिखाई।
पैनोरमिक कोच यथावत
कालका-शिमला रेल खंड पर चलने वाले पैनोरमिक कोच को लेकर अभी भी फैसला नहीं हो पाया है, हालांकि खामियों को दूर करने के लिए रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला और आरडीएसओ लखनऊ के विशेषज्ञ पुरजोर प्रयास कर रहे हैं, बावजूद इसके अभी कोच में कूलिंग की समस्या बरकरार है। इसलिए अभी कोच के संचालन को लेकर सैलानियों को इंतजार करना होगा।
9 नवंबर 1903 में हुई शुरुआत
विश्व धरोहर में शामिल ऐतिहासिक कालका-शिमला रेलवे मार्ग 9 नवंबर 2025 को 122 साल का हो जाएगा। 9 नवंबर 1903 को कालका-शिमला रेलमार्ग की शुरुआत हुई थी। देश-विदेश के सैलानी शिमला के लिए इसी रेलमार्ग से टॉय ट्रेन में सफर का लुत्फ उठाते हैं। 1896 में इस रेल मार्ग को बनाने का कार्य दिल्ली-अंबाला कंपनी को सौंपा गया था। 96 किमी लंबे रेलमार्ग पर 18 स्टेशन है। कालका-शिमला रेलमार्ग को केएसआर के नाम से भी जाना जाता है। कालका-शिमला रेललाइन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने जुलाई 2008 में इसे विश्व धरोहर में शामिल किया था।
103 सुरंगें
कालका-शिमला रेललाइन पर 103 सुरंगें सफर को रोमांचक बनाती हैं। बड़ोग रेलवे स्टेशन पर 33 नंबर बड़ोग सुरंग सबसे लंबी है। इसकी लंबाई 1143.61 मीटर है। सुरंग क्रॉस करने में टॉय ट्रेन ढाई मिनट का समय लेती है। रेलमार्ग पर 869 छोटे-बड़े पुल हैं। पूरे रेलमार्ग पर 919 घुमाव आते हैं। तीखे मोड़ों पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर घूमती है। कालका-शिमला रेलमार्ग नेरोगेज लाइन है। इसमें पटरी की चौड़ाई दो फीट छह इंच है।