बारिश से धान में अधिक नमी होने से फूट सकता है दाना
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। ‘क्या ये खराब फसल भी उस सेटेलाइट से देखी जा सकती है, जिससे पराली जलाता किसान दिख जाता है।’ ऐसे ही सोशल मीडिया पर चल रहे मैसेज किसानों के दुखों को बयां कर रहे हैं। बता दें कि किसान बारिश के कारण खराब हुई फसल का मुआवजा लेने के लिए कृषि विभागों में आकर खराब फसल का आंकड़ा दे रहे हैं, लेकिन यह मुआवजा अंबाला के लगभग 59 हजार किसानों में से 21 हजार किसानों को ही मिलेगा, जिनकी फसल खराब हुई है। बाकी आधे से अधिक किसान फसल खराब होने पर केवल दुखी ही हो सकते हैं।
किसान जसबीर सिंह, सुखदेव सिंह, बीटा राम, सोहन लाल व अन्य का कहना है कि अगर सेटेलाइट से सभी पराली जलाने वाले किसानों की फोटो दिख जाती है तो मुआवजे के समय केवल उन्हीं किसानों को ही मुआवजा मिलता है, जिन्होंने पहले सरकार की जेब में पैसे भरे हों। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो अगर धान अधिक समय तक पानी में पड़ा रहता है तो उससे नमी की मात्रा अधिक हो जाएगी और दाना फूट जाएगा। इससे धान की फसल पूरी तरह से नष्ट हो सकती है। धान का दाना पूरी तरह से पक चुका था, जिस कारण उनके फूटने के अधिक आसार हैं। धान की फसल में दाना होने के कारण फसल भारी हो जाती है जिससे धूप निकलने पर भी फसल के वापस खड़े होने के आसार बहुत कम हो जाते हैं।
अभी तक 80 से अधिक किसान कर चुके आवेदन
अभी तक 80 से अधिक किसान फसल के मुआवजे के लिए आवेदन कर चुके हैं। जिस तरह से मौसम विभाग आने वाले दिनों में भी बारिश होने की संभावना जता रहा है, इससे यह आंकड़ा बढ़ सकता है। वहीं इस आंकड़ों के अनुसार इन आवेदकों के द्वारा अभी तक 200 एकड़ से अधिक जमीन के सर्वे करने के लिए कार्य किया जा रहा है।
मंडी में आई 560 क्विंटल धान
मंडी में बारिश होने के बाद भी 560 क्विंटल धान सिटी अनाज मंडी पहुंच चुकी है। जैसे ही बारिश कम होगी मंडियों में धान की आवक में तेजी आएगी। वहीं आढ़तियों का कहना है कि अधिक बारिश होने के कारण बोरियों में रखी हुई धान भीग रही है। अगर बोरियों को अधिक पानी लगा और धूप जल्दी नहीं आती है तो किसान और आढ़ती दोनों को ही अधिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
कोट्स
अभी तक 80 किसान मुआवजे के लिए आवेदन कर चुके हैं। 21 हजार के करीब किसानों ने फसल बीमा योजना के अंतर्गत आवेदन करवाया था।
- गिरीश नागपाल, उप कृषि निदेशक, अंबाला।