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महापंचायत में किसानों ने दी चेतावनी- 20 तक मुआवजा नहीं आया तो चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवारों का करेंगे विरोध

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20 तक मुआवजा नहीं आया तो चुनाव में भाजपा का करेंगे विरोध
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। शहर की नई अनाज मंडी में मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन की ओर से किसानों की महापंचायत बुलाई गई, जिसकी अध्यक्षता भाकियू की लोकल बॉडी ने की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से फसल बीमा होने के बावजूद भी पूरा मुआवजा न आने पर चर्चा की गई। किसानों का कहना था कि अक्तूबर में ओलावृष्टि हुई थी, जिस कारण क्षेत्र के करीब 55 गांवों में फसल बुरी तरह प्रभावित हुई थी, लेकिन फसल बीमा होने के बावजूद भी जब अधूरी मुआवजा राशि आई तो उन्होंने आंदोलन का रास्ता पकड़ा। किसानों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 20 अप्रैल तक किसानों को मुआवजा न दिया तो मौजूदा सरकार के जो उम्मीदवार लोस चुनावों में उतरेंगे, उनका विरोध करेंगे। इस दौरान किसानों की महापंचायत में जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम कमलप्रीत कौर व तहसीलदार विक्रम सिंगला पहुंचे।
किसान अमरजीत सिंह ने कहा कि जिन किसानों की फसल का बीमा नहीं हुआ था, उन्हें पांच एकड़ की जगह पूरी फसल का मुआवजा मिलना चाहिए। बीमा कंपनियों को स्कीम की क्रॉप कटिंग को सार्वजनिक किया जाए, ताकि बीमा युक्त किसानों को गांव वाइज मुआवजा मिले। सरकार की ओर से जो बीमा कंपनियां किसानों पर थोपी गई हैं। उनमें आगजनित फसल नष्ट मुआवजा तो पहले से ही शामिल नहीं था। साथ ही कंपनियों ने अब आगे से जल भराव से नष्ट हुई फसल को भी इस स्कीम से बाहर निकाल दिया है। फसल नष्ट के 48 घंटे के भीतर बीमा कंपनी की ओर से जो एप्लीकेशन देने की शर्त है, उसके लिए समय सीमा तय नहीं होनी चाहिए। क्योंकि ज्यादातर किसान इसे पूरा नहीं कर पाते, क्योंकि कंपनी का स्थायी तौर पर कोई कार्यालय नहीं है। फसल बीमा में नुकसान के बाद मुआवजा राशि मिलने का समय दो महीने है। इसके अलावा जितना ज्यादा समय लगेगा उतना ही कंपनी पर जुर्माना लगना चाहिए तथा किसान को मुआवजा ब्याज सहित मिलना चाहिए। पशुओं द्वारा नष्ट फसल की भरपाई सरकार को करनी चाहिए।
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सरसों के निर्धारित मूल्य पर उठाए सवाल
महापंचायत में मौजूद किसानों ने कहा कि सभी फसलें निर्धारित रेट पर ही बिकनी चाहिए। लेकिन, सरसों, चना, उड़द व मूंग निर्धारित रेट पर नहीं बिक रही। किसानों ने क्षत्रीय मंडी नन्यौला का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर मंडी होने के बावजूद भी किसान अपनी सरसों की फसल नहीं बेच सकते। उन्हें उसे निर्धारित रेट लेने के लिए शाहजादपुर मंडी में जाना पड़ेगा, जिस कारण व्यापारी किसान की सरसों एक हजार रुपये प्रति क्विंटल कम खरीद रहे हैं। किसानों ने सरकार से मांग की है कि वह जिले की 15 मंडियों में ही किसानों की सभी फसलों की सरकारी रेट पर खरीद करे ताकि किसानों का अतिरिक्त खर्च न हो।
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यह लिए फैसले
किसानों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 20 अप्रैल तक सरकार ने बीमा युक्त व बीमा रहित किसानों को मुआवजा न दिया तो मौजूदा सरकार के जो उम्मीदवार लोस चुनावों में उतरेंगे उनका विरोध करेंगे। इसके बाद उन्होंने बताया कि यदि हरियाणा विस चुनाव से पहले सरकार दिल्ली व छत्तीसगढ़ की तर्ज पर फसल मूल्य नहीं देगी तो किसान आंदोलन करके सरकार की किसान विरोधी नीतियों का विरोध करेंगे। कार्यक्रम में सैकड़ों की तादाद में किसान पहुंचे। इस मौके पर भाकियू के प्रदेश प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी, जिला प्रधान मलकीत सिंह, अमरजीत सिंह, गुलाब सिंह, सुखविन्द्र सिंह, हरपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
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