सरस मेले में पंजाबी गायक सरदूल सिकंदर ने गायकी से बांधा समा
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। सरस मेले में पंजाबी गायकी के फनकार माने जाने वाले सरदूल सिकंदर ने गायकी के पहलुओं को प्रदर्शित और परिभाषित किया। लय, सुर और संगीत के संगम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सरदूल की पंजाबी अभिव्यक्ति ने जमकर तालियां बटोरी। हुस्नवाले कबूतर की नस्ल होते हैं, कभी इसकी बगल में कभी उसकी बगल में होते हैं, इस अभिव्यक्ति पर दर्शकों ने जमकर ठहाके लगाए। मैं काला मेरे यार भी काले की प्रस्तुति और अभिव्यक्ति भी बहुत शानदार रही।
वहीं मेजर जनरल संजीव चौधरी जीओसी पंजाब हरियाणा, हिमाचल सब एरिया ने सोमवार देर सायं राज्य स्तरीय सरस मेले के 11वें दिन सांस्कृतिक संध्या के अवसर पर बतौर मुख्यातिथि कहा कि संगीत हमारी संस्कृति का मजबूत आधार है। संगीत देश की संस्कृति को जोडने का काम करता है। संगीत हर मनुष्य के जीवन को रसमय बना कर तनाव को कम करता है। हमारी संस्कृति, कला और संगीत ने पूरे विश्व में हमें एक अलग पहचान दी है। उन्होंने विश्व विख्यात पंजाबी गायक सरदूल सिकंदर की गायकी की प्रंशसा करते हुए कहा कि कलाकार सामाजिक ताने-बाने को जोड़े रखने और आगे बढ़ाने का काम करते हैं। कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से सामाजिक भाई-चारे और आपसी सद्भावना के सन्देश साथ-साथ राष्ट्रभक्ति का जीवंत पैगाम भी देते हैं। हम सभी को चाहिए कि इनसे प्रेरणा लेकर नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करें और उन्हें सामाजिक मूल्यों से आत्मसात् करवाएं। इससे पूर्व मेजर जनरल संजीव चौधरी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रम अग्रवाल, उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़, अतिरिक्त उपायुक्त कैप्टन शक्ति सिंह, नगराधीश सुशील कुमार, एसडीएम अदिति ने शहीदों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित करे श्रद्धांजलि दी और मेले का भ्रमण किया। दस्तकारों, बुनकरों, हस्तशिल्पियों से भी विचार सांझा किए और उनके अनुभव जाने। इस मौके पर उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़, सरदार मनजीत सिंह बराड़, माता सुरजीत कौर बराड़, डीएफएससी निशांत राठी भी उपस्थित रहे।