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जमीन पर हक को लेकर आज से भूख हड़ताल पर तोपखाना परेड के निवासी

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जमीन पर मालिकाना हक के लिए भूख हड़ताल पर बैठे तोपखाना परेड निवासी
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। रक्षा मंत्रालय की भूमि पर बसे तोपखाना परेड में जमीन हस्तांतरण के मामले में लोगों का विरोध अब तीव्र हो गया है। सोमवार से क्षेत्रवासी अब भूख हड़ताल करेंगे। रक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच चल रहे जमीन हस्तांतरण के मामले को जहां कांग्रेस केवल चुनावी स्टंट करार दे रही है। वहीं भाजपा दावा कर रही है कि यह प्रक्रिया अभी उच्च स्तर पर चल रही है।
मामले को लेकर लोगों का विरोध बढ़ता जा रहा है, क्योंकि गत दिनों परेड में निर्माण कार्य को कैंटोनमेंट बोर्ड के दस्ते ने अवैध बताते हुए ध्वस्त कर दिया था, साथ ही कुछ लोगों पर मामले भी दर्ज कराए थे। इसी को लेकर क्षेत्र के लोगों में उपजा रोष अब शांत नहीं हो रहा है। रविवार को सैकड़ों की संख्या में तोपखाना परेड में लोग इकट्ठा हुए, जिन्होंने मामले को लेकर रोष जताया। उनका आरोप था कि जमीन हस्तांतरण के मामले को लेकर अब तक उन्हें केवल बरगलाया जा रहा है। उन्होंने इस दौरान संघर्ष की घोषणा की और कहा कि सोमवार से अब प्रतिदिन पांच लोग परेड में भूख हड़ताल पर बैठेंगे। मामले को लेकर विरोध जता रही संयुक्त समाज सेवा संघ के सदस्य शैलेंद्र कुमार, तिलक राज, विजय कुमार, राज दुलारी, रजनी आदि ने कहा कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक उन्हें भूमि का मालिकाना हक नहीं मिल जाता। उधर, विरोध प्रदर्शन के दौरान क्षेत्रवासियों ने पुलवामा हमले में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
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सरकार ने यह बनाया था प्रपोज्जल
बीते साल अक्तूबर में मंत्री अनिल विज के नेतृत्व में राज्य सरकार की ओर से प्रपोज्जल तैयार किया गया था, जिसमें रक्षा मंत्रालय की अंबाला में स्थित 261 एकड़ भूमि राज्य सरकार को हस्तांतरित की जानी थी। इसमें 168 एकड़ भूमि तोपखाना परेड में है जबकि शेष भूमि दुधला मंडी, गुलाब मंडल और तोपखाना परेड में है। इस भूमि के लिए कुल 86 करोड़ रुपये कीमत आंकी गई है। प्रदेश सरकार ने दावा किया था कि रक्षा मंत्रालय को भूमि के बदले उसके कलेक्टर रेट के हिसाब से 86 करोड़ रुपया देगी। मगर इसके बाद आगामी कार्रवाई क्या हुई, इसपर अभी संशय है।
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1941 में दी थी भूमि लीज पर
तोपखाना परेड स्थित भूमि डिफेंस लैंड सर्वे नंबर 65 के तहत कुल 168 एकड़ भूमि है, जोकि बी-4 डिफेंस लैंड श्रेणी में है। हालांकि यह भूमि डिफेंस इस्टेट आफिसर (डीईओ) के अधीन है, मगर जमीन पर निर्माण, रखरखाव अन्य की जिम्मेदारी कैंटोनमेंट बोर्ड की है। यहां 500 से ज्यादा घर और करीब 3200 मतदाता हैं। यह लीज भूमि है, जहां दशकों से बसे लोग खेती कर रहे हैं। भूमि ब्रिटिश हुकूमत के समय 1941 में लीज पर दी गई थी। इसके बाद डीईओ अंबाला द्वारा मई 1975 के बाद लीज को एक्सटेंड नहीं किया गया। लीज एक्सटेंड नहीं होने के बावजूद लोग यहां बसे थे।
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- मामले को लेकर रक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार स्तर पर कार्रवाई चल रही है। ऊपरी स्तर पर कार्रवाई होने के बाद स्थानीय स्तर पर कैंटोनमेंट बोर्ड व डीईओ के पास फाइल आएगी। मंत्री विज के नेतृत्व में हम सही मंशा से लोगों के लिए कार्य कर रहे हैं। दशकों से जो कार्य नहीं हुए अब वह पूरे हो रहे हैं और विपक्षी पार्टियों को यही हजम नहीं हो रहा और परेड के निवासियों को बरगलाया जा रहा है।
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- अजय बवेजा, उपाध्यक्ष, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।

- चुनावों से पहले भाजपा लोगों को झूठा हसीन ख्वाब दिखा रही है। जमीन हस्तांतरण की कोई कार्रवाई नहीं चल रही है। तोपखाना परेड के निवासी बीते कई दिनों से विरोध जता रहे हैं, मगर न तो भाजपा नेता न ही कैंटोनमेंट बोर्ड अधिकारी मौके पर गए हैं। यदि जमीन हस्तांतरण के मामले में सच्चाई होती तो वह कैंटोनमेंट बोर्ड के जरूरी होती। यह केवल राजनीति स्टंट है।
सुरेंद्र तिवारी, पार्षद, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।
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