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प्रशासन की सख्ती और लोगों का सहयोग, तभी सुधरेंगे हालात

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ट्विन सिटी के बाजारों में ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या पर बोले दुकानदार और एसोसिएशन के पदाधिकारी...
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प्रशासन करे सख्ती और लोग सहयोग, तभी सुधरेंगे हालात
फोटो नंबर :: 41 से 45
अमर उजाला अभियान
कहा- अतिक्रमण सबसे बड़ी समस्या, बाजारों में छोटी पार्किंग देने की व्यवस्था हो
जहां डिवाइडर नहीं हैं, वहां रोड को वन-वे किया जाए
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। ट्विन सिटी के बाजारों में ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या का समाधान हो सकता है, लेकिन इसके लिए दुकानदार और एसोसिएशन पदाधिकारी मानते हैं कि प्रशासन भी इसमें सहयोग करे और जनता भी। यह समस्या उदासीनता के चलते लगातार गंभीर होती जा रही है, जबकि अब इसका हल ढूंढने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे।
ट्विन सिटी में साल 2004 से ट्रैफिक और पार्किंग व्यवस्था बनाने की मुहिम चल रही है। इसके तहत पहले अंबाला कैंट की सबसे व्यस्त सड़क निकलसन रोड पर लोहे के पोल सड़क के बीच लगाए गए, ताकि अप एंड डाउन पर ट्रैफिक चलता रहे। लेकिन, यह प्रयोग असफल रहा। इसके बाद पीली पट्टी व प्लास्टिक कोण लगाए गए। यह व्यवस्था भी ज्यादा दिनों तक नहीं चली, जबकि पीली पट्टी की व्यवस्था आज भी है। इसके साथ ही बाजारों में पार्किंग के लिए अलग से जगह देने की व्यवस्था नहीं बन पाई, जिसके चलते यह समस्या और गहरा गई है।
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यह कहते हैं लोग
डिवाइडर बनने से बेशक ट्रैफिक तो दोनों तरफ से चलता रहता है, लेकिन पीली पट्टी की जगह नहीं बचती। साथ ही पार्किंग बनाने की जगह भी नहीं बची है, जिस कारण यह दिक्कतें हैं। समस्या तभी हल हो सकती है, जब भारी वाहनों की एंट्री बंद की जाए।
-मनिंदर सिंह, दुकानदार, राय मार्केट।
यह समस्या ज्यादा बड़ी नहीं, जबकि मिल-बैठकर इसका समाधान हो सकता है। व्यवस्थाएं तो हैं, लेकिन उसे नियमित बनाया जाए, तो बेहतर होगा। इसमें प्रशासन भी कुछ ऐसी व्यवस्था दे ताकि बाजारों में पार्किंग बेतरतीब न हो।
-अजय गुलाटी, दुकानदार, सदर बाजार।
बाजारों में दुकानदारों का अतिक्रमण ज्यादा है, उसे हटाया जाए। जब तक अतिक्रमण रहेगा, न तो पार्किंग की जगह मिलेगी और न ही ट्रैफिक सही से निकल पाएगा। आम जनता भी थोड़ा समझे और प्रशासन भी सख्ती करे तो हल हो सकता है।
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-नरेश अग्रवाल, प्रधान, सराफा बाजार एसोसिएशन, अंबाला सिटी।
बाजारों में ट्रैफिक वन-वे होना चाहिए और इस पर सख्ती से अमल किया जाए। कई बार देखा है कि वन-वे किया जाता है तो विरोध होता या फिर कुछ दिन की सख्ती के बाद फिर से वही हालात बन जाते हैं। जो भी नियम या व्यवस्था दी जाती है उस पर टिकना जरूरी है।
-जितेंद्र वर्मा, स्वर्णकार संघ, अंबाला सिटी।
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