फर्द की शर्त ने बढ़ाई टेंशन, किसान बोले- यह जल्दबाजी में लिया फैसला
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अमर उजाला ब्यूरो
नारायणगढ़। मंडी में धान बेचने आने वाले किसानों के लिए जमीन की फर्द की शर्त लगाने के बाद किसानों की टेंशन बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यह जल्दबाजी में लिया गया फैसला है। उनका अधिकतर समय तो पटवारियों के चक्कर काटने में बीत जाएगा।
क्षेत्र के किसान कली राम, बलविंद्र सिंह, बचना राम, कुलविंद्र सिंह, सचिन कुमार, धर्मवीर, श्याम लाल, प्रवीन कुमार का कहना है कि पहले तो धान बेचने के लिए प्रदेश सरकार ने मोबाइल नंबर अनिवार्य किया था तथा उसके बाद आधार कार्ड का नंबर भी अनिवार्य कर दिया था। अब इस तुगलकी फरमान से किसानों को अपना धान मंडी में बेचने से पूर्व हल्का पटवारियों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। किसानों का कहना है कि उन्होंने जमीन चकौते पर लेकर उसमें धान की फसल की बुआई की थी, जिस खेत में उन्होंने धान की फसल की बुआई की थी, उस खेत की फर्द तो पटवारी खेत मालिक के नाम ही जारी करेगा, न कि चकौते वाले के नाम। इन हालात में उन्हें धान बेचने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त क्षेत्र के गांवों में अपना कारोबार कर रहे अनेक दुकानदार भी ग्रामीणों से धान आदि लेकर उन्हें अपनी दुकान का सामान बेचते हैं। जो अनाज उनके पास इकट्ठा होता है, वह भी उसे मंडी में ही बेचते हैं, इस फरमान से उनका अनाज मंडियों में कैसे बिकेगा।
मार्केट कमेटी सचिव धर्मेंद्र ने बताया कि मार्केटिंग बोर्ड के उच्चाधिकारियों के आदेशानुसार ही उन्होंने यह आदेश जारी किए हैं। इस आदेश से क्षेत्र के धान उत्पादकों के साथ-साथ अनाज मंडी के आढ़तियों में भी रोष है। अभी तक नारायणगढ़ अनाज मंडी से 6 लाख क्विंटल से ज्यादा धान की खरीद सरकारी खरीद एजेंसी हैफेड कर चुकी है। आढ़तियों के साथ-साथ धान उत्पादकों का कहना है कि अब तो मात्र कुछ ही हजार क्विंटल धान आना शेष रह गया है, ऐसे में सरकार द्वारा जारी किए गए इन तुगलकी आदेशों से किसानों के साथ-साथ आढ़तियों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ेगी।