गुड़गांव में लिव-इन में रही महिला जासूस ने दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल में तैनात राष्ट्रपति के वीरता पुरस्कार से सम्मानित इंस्पेक्टर को गोली मारकर खुद भी जान दे दी।
पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में ले लिया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि महिला ने पहले इंस्पेक्टर को गोली मारी और फिर खुदकुशी की।
उसने ऐसा क्यों किया, इसका पता नहीं चल पाया है। महिला के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया गया है।
जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल में इंस्पेक्टर बदरीश दत्त और दिल्ली में डिटेक्टिव एजेंसी चलाने वाली गीता शर्मा कुछ अरसे से लिव-इन में रह रहे थे।
जांचकर्ताओं को संदेह है कि महिला गीता शर्मा (45) ने पहले बदरीश दत्त को उनकी सर्विस पिस्तौल से गोली मारी और उसके बाद आत्महत्या कर ली। गीता हाल में जालसाजी के एक मामले में गिरफ्तार हुई थी।
दोनों गत एक साल से साथ रह रहे थे। गुड़गांव के पुलिस कमिश्नर आलोक मित्तल ने संवाददाताओं से कहा, 'दोनों के शवों पर गोली लगने के निशान हैं।'
दोनों के शव गीता के गुड़गांव के सेक्टर 52 स्थित आरडी सिटी स्थित घर में सुबह मिले। जांचकर्ताओं का मानना है कि घटना देर रात एक बजे से सुबह चार बजे के बीच हुई होगी।
शनिवार सुबह करीब 10 बजे दिल्ली से उन्हें लेने आई गाड़ी के चालक व जवानों ने उन्हें बार-बार फोन किए। फोन रिसीव न हुआ तो उन्होंने जानकारी सुशांत लोक थाने को दी।
थाना पुलिस दरवाजा तोड़कर अंदर घुसी तो डाइनिंग टेबल के पास दोनों की खून से सनी लाशें पड़ी थीं। इंस्पेक्टर और महिला की कनपटी पर गोली के निशान थे।
इंस्पेक्टर की सर्विस रिवॉल्वर महिला के हाथ में थी। इसके बाद फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'इससे हमें संदेह होता है कि गीता ने पहले दत्त को गोली मारी और उसके बाद आत्महत्या कर ली। आगे की जांच जारी है।'
डीसीपी ईस्ट महेश्वर दयाल ने बताया कि गीता शर्मा मूल रूप से मुंबई की रहने वाली थी। दस साल से वह आरडी सिटी में रह रही थी। वह दिल्ली में डिटेक्टिव एजेंसी चलाती थी।
तलाकशुदा गीता के माता-पिता अब भी मुंबई में रहते हैं, जबकि बेटा सिंगापुर में है। पुलिस ने घटना की जानकारी उसकी बहन को दी है।
लोधी एस्टेट स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर कैलाश चंद के बयान पर गीता के खिलाफ बदरीश की हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
बदरीश अपने परिवार से अलग हो गए थे और गीता के साथ रह रहे थे। गीता को हाल में जालसाजी के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था और तिहाड़ जेल में तीन सप्ताह बिताने के बाद उसे जमानत पर रिहा किया गया था।
बदरीश 1991 में दिल्ली पुलिस में शामिल हुए थे और वह उन कुछ कर्मियों में शामिल थे जिन्हें 1994 में विशेष इकाई बनने के बाद उसमें शामिल किया गया था।