वाटर ट्रीटमेंट अगर चालू हो जाता तो कैंटीन में पीने के पानी की बोतल बिक्री नहीं होती। जानकारों की माने तो परिसर में प्रतिदिन 2500 से 3 हजार दर्शक आते हैं। जिसमें करीब एक हजार लोग पीने का पानी खरीदते हैं। पिछले दिनों 25 रुपये से 30 रुपये तक में ठंडे पानी की बोतल बेचे जाने की शिकायत सामने आ चुकी हैं। आरोप यह भी लगा कि मनमाने तरीके से अपने चहेतों से कैंटीन संचालन करवाया जा रहा है।
एक्वा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुजीत कुमार ने कहा कि चिड़ियाघर के बनने के पहले ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार करा दिया गया था। लेकिन, इसे प्रयोग में लाने के लिए बिजली कनेक्शन नहीं दिया जा सका। इसके अलावा भुगतान भी अभी पूरा नहीं हुआ है। भुगतान हो जाए और बिजली कनेक्शन दे दिया जाए तो इसे चालू करवा दूंगा।
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राजकीय निर्माण खंड के एसडीओ सिविल बीबी निरंजन ने कहा कि बिजली कनेक्शन के लिए बोला गया था। चालू क्यों नहीं हो सका, यह मेरे भी समझ में नहीं आ रहा है। प्लंट लगाने वाली कंपनी को पूरा भुगतान कर दिया गया था। उन्हें प्लांट चालू करना चाहिए था। मेरे निर्देशन में ही इसे बनाकर तैयार करवाया गया था।
चिड़ियाघर के निदेशक एच राजामोहन ने कहा कि प्लांट के नहीं चलने से काफी दिक्कतें होती हैं। कई बार कार्यदायी संस्था को पत्र लिखा गया। प्रबंधन अपनी तरफ से दर्शकों के पीने के पानी का आरओ तैयार करवाया है। अगर आरओ खराब है तो उसे ठीक करवा दिया जाएगा।