केरल के बाद कानपुर में जीका वायरस के 13 केस मिलने के बाद शासन ने स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। निर्देश है कि केरल और कानपुर से आने वाले लोगों की जांच कराएं। अगर जीका वायरस के लक्षण दिखते हैं तो उनका नमूना (सैंपल) लेकर केजीएमयू लखनऊ भेजा जाए।
जानकारी के मुताबिक केरल में जीका वायरस के केस अब भी मिल रहे हैं। कानपुर में 13 केस अब तक मिल चुके हैं। बेहद खतरनाक वायरस होने की वजह से शासन इस संबंध में सतर्कता बरत रहा है। सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि जीका वायरस से पैदा बीमारी के लक्षण डेंगू से मिलते-जुलते हैं। ऐसी स्थिति में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर डेंगू वाले लक्षण लोगों में नजर आते हैं, तो तत्काल वे डॉक्टर से सलाह लें। खुद दवा का सेवन न करें। बताया कि केरल और कानपुर से आने वाले लोगों पर निगाह रखने के निर्देश आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिए गए हैं। यह लोग दस्तक अभियान के तहत ऐसे लोगों की तलाश में भी जुटी हुई हैं।
मच्छर जनित बीमारी है जीका वायरस
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जीका वायरस मच्छर जनित बीमारी है, जो एडीज मच्छर से फैलती है। मच्छरों की यही प्रजाति डेंगू और चिकनगुनिया का भी कारण बनती है। जीका वायरस के शिकार लोगों में अक्सर लक्षण नजर नहीं आते हैं या बहुत हल्के हो सकते हैं। रोगियों में बुखार, चकत्ते, जोड़ों और आंखों के पीछे दर्द, उल्टी जैसी दिक्कत हो सकती है। यही लक्षण लगभग डेंगू के भी हैं।
गर्भवती को ज्यादा खतरा
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जीका वायरस और डेंगू के लक्षण मिलते-जुलते हैं। यही कारण है कि लोग इसकी पहचान नहीं कर पाते हैं। चिंता की बात यह है कि गर्भवती महिलाओं को जीका वायरस ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे भ्रूण को नुकसान पहुंच सकता है। संक्रमित मच्छरों के काटने के अलावा जिन इलाकों में जीका वायरस का प्रकोप हो वहां की यात्रा करने से संक्रमण का खतरा ज्यादा है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति से शारीरिक संबंध बनाने या रक्त के आदान प्रदान से भी यह संक्रमण हो सकता है। जीका के गंभीर संक्रमण के कारण मस्तिष्क और आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।