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अनोखा बंधन: भाई के डॉक्टर बनने के सपने के लिए छोटी बहन ने भुला दिए अपने अरमान, मिशाल हैं 'मंजूलता'

Tue, 29 Aug 2023 01:06 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

 मंजूलता बताती हैं कि पिताजी, छोटे भाई को डॉक्टर बनाना चाहते थे। लेकिन तब सबकी पढ़ाई और शादी का खर्च उठा रहे पिता के पास इतने रुपये नहीं बचे थे। छोटे भाई की पढ़ाई का खर्च जुटाने की बजाय उसकी शादी के लिए दहेज जुटाने में लगे थे। पिता और भाई के सपनों को पूरा करने के लिए मंजूलता ने शादी से इंकार कर दिया।
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मंजूलता पांडेय। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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भाई-बहन के बीच प्रेम को त्याग से और ऊंचाई मिलती है, इसे चरितार्थ किया है दक्षिणी बेतियाहाता के पांडेय भवन में रहने वाली मंजूलता पांडेय ने। वह तीन बहनों और दो भाइयों में सबसे छोटी हैं। डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे भाई की फीस भरने में दिक्कत न हो, इसलिए उन्होंने अपनी शादी से इंकार कर दिया था। अब 91 वर्षीय पिता की देखभाल करने के साथ ही वह कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की बेटियों का भी भविष्य संवार रही हैं।
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मूल रुप से संतकबीरनगर जिले के मुखलिसपुर निवासी मंजूलता अपने पिता सेवानिवृत्त बीडीओ हनुमान प्रसाद पांडेय संग बचपन से शहर में रहती हैं। बड़ी सुशीला, दूसरे नंबर के भाई वीरेंद्र कुमार पांडेय, तीसरे नंबर की बहन पुष्पलता पांडेय और चौथे नंबर के भाई डॉ. धीरेंद्र पांडेय हैं। माता दुलारी देवी का वर्ष 2019 में गंभीर बीमारी से निधन हो गया था। महराजगंज में अधिवक्ता रहे उनके भाई वीरेंद्र कुमार पांडेय की एक साल पूर्व हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।



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छोटे भाई डॉ. धीरेंद्र अहमदाबाद में परिवार संग रहते हैं। मंजूलता बताती हैं कि पिताजी, छोटे भाई को डॉक्टर बनाना चाहते थे। लेकिन तब सबकी पढ़ाई और शादी का खर्च उठा रहे पिता के पास इतने रुपये नहीं बचे थे। दो बहनों की शादी कर चुके पिता, छोटे भाई की पढ़ाई का खर्च जुटाने की बजाय उसकी शादी के लिए दहेज जुटाने में लगे थे।

पिता और भाई के सपनों को पूरा करने के लिए मंजूलता ने शादी से इंकार कर दिया। दहेज के लिए बचाए गए रुपये भाई की पढ़ाई पर खर्च किए गए। भाइयों-बहनों की शादी होने पर माता-पिता के देखभाल की पूरी जिम्मेदारी मंजूलता पर आ गई। पिता के देखभाल के अलावा वह कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में बच्चों को पढ़ा रही हैं।

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पिता के निधन के बाद बहन ने कराई भाई की पढ़ाई

ज्यादातर माता-पिता ही बच्चों को पढ़ा-लिखाकर इस काबिल बनाते हैं कि वे अपने पैरों पर खड़ा हो सकें, लेकिन शहर के नंदानगर निवासी प्रवीण पांडेय की बहनों ने न सिर्फ अपने भाई का ना सिर्फ पालन-पोषण किया, बल्कि उसे पढ़ाकर पुलिसकर्मी भी बनाया।

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शहर के नंदानगर निवासी प्रवीण पांडेय की मां का देहांत, जब वह आठ वर्ष के थे, तभी हो गया था। पिता पुलिस विभाग में शहर से बाहर पोस्ट थे। प्रवीण का पालन-पोषण उनकी दो बहने गोल्डी और स्वाति ने ही किया। इस बीच गोल्डी की शादी हो गई तो वह प्रवीण को भी अपने साथ ही ले गईं और अपने साथ ही रखकर उनकी पढ़ाई पूरी कराई।

इस बीच उनके पिता का निधन कैंसर से हो गया। इसके बाद प्रवीण ने भी पुलिस के नौकरी के लिए प्रयास किया, इसमें उनकी बहनों ने उन्हें पूरा सहयोग दिया। वर्तमान में प्रवीण को यूपी पुलिस में नौकरी मिल गई है और वह श्रावस्ती में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
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