ये हैं लक्षण
मांसपेशियों की कमजोरी, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी की वजह से चलने में समस्या, कूल्हों के पास दर्द होना, दर्द का धीरे-धीरे कूल्हों से पीठ के निचले हिस्से, पैर और पसलियों तक पहुंच जाना, खून में कैल्शियम का स्तर बहुत कम होना, दिल की अनियमित धड़कन, मुंह के आसपास के इलाकों का सुन्न होना, हाथ और पैर सुन्न होना, हाथों-पैरों में ऐंठन।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित मिश्रा ने कहा कि ऑस्टियोमैलेसिया बीमारी की चपेट में आने से युवाओं की हड्डियां कमजोर हो रहीं हैं। इसकी प्रमुख वजह एसी का अधिक प्रयोग, अनियमित दिनचर्या और कम शारीरिक श्रम है। पिछले दो सालों के अंदर इस बीमारी की चपेट में आने वाले युवाओं की संख्या काफी बढ़ी है। अगर यही स्थिति रही तो 40-50 वर्ष तक जाते-जाते हड्डियों के फ्रैक्चर होने का खतरा 70 से 80 प्रतिशत बढ़ जाएगा।
जंक फूड से बचें, रोज करें व्यायाम
डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि युवाओं को शरीर खासकर हड्डियों के प्रति ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है। ऑस्टियोमैलेसिया से बचने के लिए पौष्टिक आहार का सेवन करें। रोजाना कम से कम एक घंटे व्यायाम करें। फास्ट फूड और जंक फूड से बचें। कैल्शियम से भरपूर आहार लें। पनीर, पत्तेदार सब्जियां, बादाम, दूध, टमाटर, अंजीर, ब्रोकली, तिल, दही, संतरा, आंवला, सोयाबीन आदि का सेवन करें। खाने में मैग्नीशियम की मात्रा का भी ध्यान रखें। इसके लिए सोयाबीन, कद्दू, दही, मछली, केला, बादाम, स्ट्रॉबेरी, पालक, काजू आदि का सेवन करें। विटामिन-डी के लिए मछली, डेयरी उत्पाद, गाजर, दलिया आदि खाएं। लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। जितना जल्दी इलाज शुरू होगा, उतना ही मरीज के लिए बेहतर होगा।