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डॉक्टर सलाह: ऑस्टियोमैलेसिया से कमजोर हो रहीं युवाओं की हड्डियां, जानिए क्या है लक्षण

Thu, 09 Dec 2021 04:00 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

अनियमित दिनचर्या, ज्यादा समय एसी में बिताने और शारीरिक श्रम न करने से हो रही दिक्कत, बीआरडी के हड्डी रोग विभाग में रोजाना 25 से 30 फीसदी मरीज मिल रहे बीमारी से पीड़ित।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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अनियमित दिनचर्या, ज्यादातर समय एयर कंडीशनिंग (एसी) में रहने और शारीरिक श्रम कम करने से युवा ऑस्टियोमैलेसिया (अस्थिमृदुता) की चपेट में आ रहे हैं। इस बीमारी में कम उम्र में ही युवाओं की हड्डियां कमजोर हो रहीं हैं और उनके टूटने का खतरा बढ़ जा रहा है। वहीं इस बीमारी से ग्रस्त युवा को चलने-फिरने और उठने बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञाें का कहना है कि इसके प्रति समय से नहीं चेता गया तो 40 की उम्र के बाद हड्डियों के टूटने की आशंका 80 फीसदी तक बढ़ जाती है।

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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले 25 से 30 फीसदी मरीजों में ऑस्टियोमैलेसिया की शिकायत मिल रही है। युवाओं में यह बीमारी लगातार बढ़ती जा रही है। इस बीमारी की वजह अनियमित दिनचर्या, लगातार एसी का प्रयोग और किसी तरह का कोई शारीरिक श्रम न करना है।

बताया कि इस बीमारी में युवाओं की हड्डियां मुलायम होती जा रहीं हैं। एक दो केस बच्चों के भी सप्ताह में आ रहे हैं। बच्चों में इस रोग को रिकेट्स कहा जाता है। उन्होंने बताया कि अगर समय रहते अनियमित खान-पान और लगातार एसी का प्रयोग कम नहीं किया गया तो 40 की उम्र के बाद बोन फ्रैक्चर का खतरा 70 से 80 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

ग्रामीण परिवेश के लोगों में परेशानी कम

डॉ. अमित ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों में ऑस्टियोमैलेसिया की परेशानी सिर्फ 5 प्रतिशत तक ही मिल रही है। इसकी वजह यह है कि ग्रामीण इलाकों में लोगों की दिनचर्या और खानपान काफी हद तक सही है। इसके साथ ही इन इलाकों में लोग शारीरिक श्रम भी खूब करते हैं। यह उन्हें स्वस्थ रखने में काफी सहायक सिद्ध होता है।

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ये हैं लक्षण

मांसपेशियों की कमजोरी, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी की वजह से चलने में समस्या, कूल्हों के पास दर्द होना, दर्द का धीरे-धीरे कूल्हों से पीठ के निचले हिस्से, पैर और पसलियों तक पहुंच जाना, खून में कैल्शियम का स्तर बहुत कम होना, दिल की अनियमित धड़कन, मुंह के आसपास के इलाकों का सुन्न होना, हाथ और पैर सुन्न होना, हाथों-पैरों में ऐंठन।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित मिश्रा ने कहा कि ऑस्टियोमैलेसिया बीमारी की चपेट में आने से युवाओं की हड्डियां कमजोर हो रहीं हैं। इसकी प्रमुख वजह एसी का अधिक प्रयोग, अनियमित दिनचर्या और कम शारीरिक श्रम है। पिछले दो सालों के अंदर इस बीमारी की चपेट में आने वाले युवाओं की संख्या काफी बढ़ी है। अगर यही स्थिति रही तो 40-50 वर्ष तक जाते-जाते हड्डियों के फ्रैक्चर होने का खतरा 70 से 80 प्रतिशत बढ़ जाएगा।


जंक फूड से बचें, रोज करें व्यायाम

डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि युवाओं को शरीर खासकर हड्डियों के प्रति ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है। ऑस्टियोमैलेसिया से बचने के लिए पौष्टिक आहार का सेवन करें। रोजाना कम से कम एक घंटे व्यायाम करें। फास्ट फूड और जंक फूड से बचें। कैल्शियम से भरपूर आहार लें। पनीर, पत्तेदार सब्जियां, बादाम, दूध, टमाटर, अंजीर, ब्रोकली, तिल, दही, संतरा, आंवला, सोयाबीन आदि का सेवन करें। खाने में मैग्नीशियम की मात्रा का भी ध्यान रखें। इसके लिए सोयाबीन, कद्दू, दही, मछली, केला, बादाम, स्ट्रॉबेरी, पालक, काजू आदि का सेवन करें। विटामिन-डी के लिए मछली, डेयरी उत्पाद, गाजर, दलिया आदि खाएं। लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। जितना जल्दी इलाज शुरू होगा, उतना ही मरीज के लिए बेहतर होगा।
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