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Gorakhpur News: युवाओं में रील्स की लत...भौकाल के चक्कर में बर्बाद कर रहे जिंदगी

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- पिपराइच इलाके में रील्स और स्टैटस से शुरू हुए विवाद के बाद हुई थी सुधीर की हत्या
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- तिवारीपुर में अंबुज की हत्या से पहले भी सोशल मीडिया पर शुरू हुआ था विवाद

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। आजकल युवाओं में रील्स की लत काफी ज्यादा बढ़ गई है। स्कूल में पढ़ने वाले छात्र सोशल मीडिया पर फिल्मी डायलॉग और गानों से भौकाल जमा रहे हैं। यही भौकाल उनके लिए खतरनाक साबित हो रहा है। सोशल मीडिया की चकाचौंध में वह अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं।
हाल ही में पिपराइच इलाके में 11वीं के छात्र सुधीर की हत्या भी रील्स और स्टेटस से शुरू हुए विवाद के बाद हुई थी। उसने 26 दिसंबर को इंस्टाग्राम पर लिखा- अपने जीजा के दम पर कूदते हो। घर में घुसकर मारेंगे। दम है तो मुकाबला करो। इसके बाद चार लड़कों ने कोऑपरेटिव इंटर कॉलेज के कैंपस में घुसकर सुधीर पर गोली चला दी। पहला निशाना चूकने के बाद दो आरोपियों ने सुधीर का हाथ पकड़ लिया, इसके बाद गोली मारी गई। सुधीर दिन भर रील बनाता था। इंस्टाग्राम पर 100 से अधिक रील्स उसने बनाकर शेयर किए थे। वही रील उसकी हत्या का कारण बन गई। इसके पहले नवंबर में तिवारीपुर थाना क्षेत्र में अंबुज की हत्या में भी सोशल मीडिया एक बड़ा कारण था। अंबुज का गिरोह काफी समय से सोशल मीडिया पर एक्टिव था। वहां पर वह अपना भौकाल जमाते थे।
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केस एक
जून 2025 में गीडा थाना क्षेत्र के पिपरौली बाजार निवासी राज वर्मा (17) का शव राप्ती नदी में घटनास्थल से चार किलोमीटर दूर मिला था। वह कालेसर जीरो पॉइंट के पास राप्ती नदी के घाट पर रील बनाते समय डूब गया था। एसडीआरएफ ने रेस्क्यू अभियान चलाकर राप्ती नदी में बरहुआ गांव के किनारे से शव बरामद किया था।


केस दो
अप्रैल-2023 में कैंट इलाके के बेतियाहाता में युवती से मोबाइल फोन लूटने के आरोपियों पुलिस ने 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया था। पूछताछ में आरोपियों ने बताया था कि तीनों दोस्त हैं व रील बनाने के लिए जगह-जगह जाने का खर्च पूरा करने के लिए लूट करने लगे। भीड़ से बचने के लिए तमंचा भी रखते थे। पकड़े गए आरोपियों की उम्र महज 19 से 20 साल के बीच में थी।


परिवार को देना होगा ध्यान
गोरखपुर विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार ने बताया कि कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जिनके भीतर बचपन से ही उग्रता होती है। बच्चे अक्सर इसलिए बिगड़ जाते हैं क्योंकि परिवार के लोग उन पर ध्यान नहीं देते और उनकी गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से कई लोग अच्छा काम भी कर रहे हैं लेकिन कुछ लोग केवल लाइक और व्यूज के लिए भौकाल जमाने की कोशिश करते हैं। आगे चलकर वे कई बार आपराधिक घटनाओं में भी संलिप्त हो जाते हैं।
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रील्स ने संबंधों को किया है प्रभावित
गोरखपुर विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. दीपेंद्र मोहन सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर छोटे वीडियो कंटेंट (रील्स) का चलन बढ़ा है। रील्स के असंतुलित उपयोग ने सामाजिक संबंधों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। साथ ही दूसरों से आभासी तुलना के कारण लोगों में हीनभावना भी पैदा हो रही है। इसके अलावा रील्स की आदत के कारण लोगों में सामाजिक अलगाव की प्रवृत्ति बढ़ी है, व्यक्ति सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ता जा रहा है। यह रील्स का दुष्प्रभाव ही है कि डिजिटल डिटॉक्स जैसी अवधारणाएं सामने आई है। हालांकि, यह अभिव्यक्ति का एक सहज मंच भी बनकर उभरा है, परंतु आवश्यकता है कि इसका संतुलित और उद्देश्यपूर्ण उपयोग किया जाए।
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