परिवार नियोजन सेवाओं में नसबंदी बेहद सफल और कारगार है। चरगांवा ब्लॉक, नसबंदी के मामले में जिले में पहले पायदान पर है। चरगांवा ब्लॉक प्रभारी धनंजय कुशवाहा ने बताया कि श्वेता सहित 12 आशा कार्यकर्ता और एक आशा संगिनी, परिवार नियोजन सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। टीम ने दो वर्षों के दौरान 85 से ज्यादा महिलाओं की नसबंदी कराई है। इसके लिए उन्हें मंडलीय सम्मान समारोह में पुरस्कृत किया गया।
नसबंदी कराने में पुरुष पीछे
वर्ष 2018-19 में 84 पुरुषों ने ही नसबंदी कराई है। 2019-20 में 287, 2020-21 में 51 पुरुषों ने नसबंदी करवाई। वहीं 2021-22 में कुल 50 पुरुषों ने नसबंदी करवाई है।
नसबंदी विफल होने पर मिलेगा मुआवजा
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि नसबंदी के विफल होने पर 60,000 रुपये की धनराशि संबंधित को दी जाती है। नसबंदी के बाद सात दिनों के अंदर मृत्यु हो जाने पर चार लाख रुपये दिए जाते हैं। नसबंदी के आठ से 30 दिन के अंदर मृत्यु हो जाने पर एक लाख रुपये की धनराशि दी जाती है। जबकि 60 दिनों के अंदर जटिलता होने पर इलाज के लिए 50,000 रुपये की धनराशि दी जाती है।
सीएमओ डॉ आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि परिवार नियोजन समेत सभी सेवाओं में अंग्रिम पंक्ति जैसे आशा, आंगनबाड़ी और एएनएम की अहम भूमिका होती है। छोटा परिवार खुशहाली का आधार है। पात्र दंपती को आशा और एएनएम की सलाह मानकर बॉस्केट ऑफ च्वाइस में से परिवार नियोजन के साधन का चुनाव करना चाहिए।