केस-एक
शहर के रहने वाले 50 वर्षीय व्यक्ति ने 18 साल की उम्र में गुटखा का सेवन शुरू किया था। 24 साल की उम्र तक आते-आते एक दिन में 40-40 गुटखा खा लेते थे। 28 की उम्र में पहुंचे तो मुंह खुलना बंद होने लगा। चिकित्सक की सलाह के बाद भी गुटखे का सेवन बंद नहीं किया। 40 वर्ष की उम्र में दांत में दिक्कत हुई तो डॉक्टर ने बायोप्सी कराई और कैंसर का पता चला। नई दिल्ली में इलाज कराया तो जबड़ा निकालना पड़ा। इलाज में छह लाख रुपये खर्च हो गए। साथ ही डॉक्टर ने कड़ी चीज खाने से मना कर दिया है।
केस- दो
शहर के ही रहने वाले 42 वर्षीय व्यक्ति ने 23 साल की उम्र में गुटखा खाना शुरू किया। परिजनों ने कई बार मना किया, लेकिन नहीं माने। 33 साल की उम्र में कई दांत खराब हो गए। डॉक्टर ने गुटखा न खाने की सलाह दी। लेकिन, इसके बाद भी वह नहीं माने। इस बीच 38 साल की उम्र में पता चला की कैंसर का पहला स्टेज है। इसके बाद डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन अंत में उनके जबड़े निकालने पड़े। अब उनका मुंह टेढ़ा हो चुका है और बोलने में भी दिक्कत हो रही है।