पर्यावरण को अनुकूल बनाने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे में ढेर सारे कार्य किए जा रहे हैं। कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए जहां डीजल इंजन की जगह इलेक्ट्रिक इंजन के जरिये ट्रेन चलाने पर जोर है, वहीं इस वर्ष आठ लाख पौधे लगाने का भी लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा पटरियों पर टॉयलेट की गंदगी न गिरे, इसके लिए ट्रेनों में बायोटॉयलेट लगाए जा रहे हैं।
कभी ‘छोटी लाइन’ के नाम से प्रसिद्ध पूर्वोत्तर रेलवे में वर्ष 2014- 15 के पहले 24 किलोमीटर रेलखंड ही विद्युतीकृत हो पाया था। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह के मुताबिक अब 2287 किमी रेलखंड को विद्युतीकृत कर लिया गया है। यह पूर्वोत्तर रेलवे पर बड़ी लाइन का 73 प्रतिशत है।
विगत दो वित्त वर्षों 2019-20 एवं 2020-21 में पूर्वोत्तर रेलवे विद्युतीकरण में संपूर्ण भारतीय रेल पर द्वितीय स्थान पर रहा है। सभी बड़ी लाइनों को विद्युतीकृत करने का लक्ष्य दिसंबर 2023 तक है। इसके अलावा ‘हेड ऑन जेनरेशन’ (एचओजी) व्यवस्था के अंतर्गत कोचों में बिजली की सप्लाई, ओवरहेड इक्विपमेंट से इलेक्ट्रिक लोकमोटिव के माध्यम से की जा रही है। पूर्वोत्तर रेलवे से कुल 34 ट्रेनों को एचओजी युक्त कर चलाया जा रहा है। वित्त वर्ष 2020-21 में लगभग 21 करोड़ के ईंधन की बचत हुई है तथा कार्बन उत्सर्जन मेंभी कमी आई है।