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विश्व पृथ्वी दिवस: जब महराज जी के लगाए पौधे सूख गए, बाकी को कौन पूछे

Sat, 22 Apr 2023 03:39 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

डीएफओ विकास यादव ने कहा कि वन विभाग पौधे रोपने के साथ उन्हें संरक्षित करने की अपील लगातार करता रहा है। विकास कार्य के नाम पर जहां पेड़ काटे गए हैं, वहां नुकसान की भरपाई संबधित संस्था से होती है। इसके अलावा अन्य विभागों की ओर से लगाए गए पौधों को संरक्षित रखने की जिम्मेदारी उन्हीं की होती है। कई मामलों में ये इस कार्य में विफल रहे हैं।
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सीएम योगी और उपमुख्यमंत्री द्वारा रोपे गए पौधे सूख गए। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर में वर्ष 2022 के अक्तूबर माह में महंत अवेद्यनाथ राजकीय महाविद्यालय, रसूलपुर चकिया में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने पौधा रोपा। इस दौरान डीएफओ और राजकीय निर्माण निगम के अधिकारी भी साथ थे। रोपे गए पौधों की सुरक्षा का जिम्मा निर्माण निगम का था, लेकिन इन्हें सुरक्षित नहीं रखा जा सका। वर्तमान में इन पौधे के पीछे रोपने वाले के नाम का बोर्ड है, पर पौधे सूख गए हैं। यह हाल जब मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के लगाए पौधों का है तो विशेष अभियान के तहत लगाए गए पौधों को कौन पूछे।

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वन विभाग का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में जिले को हरा-भरा रखने के लिए लगभग 72 हजार हेक्टेयर में 2.15 करोड़ पौधे रोपे गए, इसमें अन्य सरकारी विभागों के पौधरोपण के आंकड़ों को मिला दिया जाए तो यह संख्या 3.42 करोड़ पहुंच जाएगी। हालांकि, ये दावे सच होते तो अब तक शहर में हरियाली और जिले में वन क्षेत्र का आंकड़ा काफी बढ़ जाता। लेकिन, ऐसा नहीं है।

पांच साल पहले जिले के वन क्षेत्र का आंकड़ा 16 हजार हेक्टेयर था, रिकॉर्ड में आंकड़ा अब भी यही है। विभाग की लापरवाही से इन वर्षों में न क्षेत्रफल के हिसाब से जंगल बढ़ा और न हरियाली। अब इस वर्ष जुलाई में एक बार फिर वन विभाग ने विशेष अभियान चलाकर लगभग 47 लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है।
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वन विभाग के किताबी आंकड़ों के अनुसार, 2019 के बाद से लगातार पौधे रोपे जाने की संख्या में बढोतरी हुई है। दावा हैं कि वर्ष-2018 में 5,29,664 लाख पौधे, वर्ष-2019 में 10,44,917 लाख, वर्ष-2020 में 15,34,170 लाख, वर्ष 2021 में 16,48,900 लाख पौधे और वर्ष -2022 में 900 हेक्टेयर में 19,10,990 लाख पौधे रोपे गए हैं। इनमें वन विभाग ने शहर के अलावा आसपास के वन क्षेत्र, पार्क, सार्वजनिक स्थलों पर पौधरोपण का दावा किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, देखरेख के बाद भी 20 प्रतिशत पौधे मौसम और अन्य कारणों से नुकसान हो जाते हैं। इस क्षति को शामिल कर लें, तो भी दावे जमीन पर नजर नहीं आते।

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जहां पौधरोपण किया भी गया, जिम्मेदार औपचारिकता निभा कर भूल गए। जबकि, नियम होता है कि वन विभाग या जिन विभागों को पौधे दिए जाते हैं, उन्हें समय-समय पर रोपे गए पौधों की निगरानी करनी होती है। जहां जरूरत पड़े, ट्री गार्ड लगाकर उन्हें सुरक्षित किया जाता है। जिम्मेदार इस तरफ ध्यान देते तो जिले में हरियाली का नजारा कुछ और होता। विश्व पृथ्वी दिवस के दिन हरियाली ढूंढने पर वन विभाग के मुहिम की विफलता साफ नजर आती है।

अब सिर्फ नाम हैं, पेड़-पौधे गायब
गोरखपुर प्रभाग में पेड़ों के नाम पर कई इलाके बसे हैं। रानीबाग, अमरुतानी, जमुनिया, पकड़ी, अर्जुनही, कटहरा, बरगदवां आदि इसमें शामिल हैं। वर्तमान में सिर्फ इन इलाकों-गावों का नाम रह गया, पेड़ खोजे नहीं दिखते। वन विभाग के रिकार्ड में इन नामों का जिक्र तो है, लेकिन इनके नाम वाले पौधे रोपने या रोपे गए पौधों के संरक्षण की चिंता नहीं है।
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विकास के नाम पर पेड़ काटे लेकिन फिर लगाना भूल गए

गोरखपुर शहर में पिछले पांच वर्षों के भीतर खूब विकास हुआ। सड़क चौड़ीकरण, फोरलेन, प्लाइओवर समेत अन्य निर्माण के दौरान 50 से 60 वर्ष के सैकड़ों पेड़ों को काट दिया गया। राज्य सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया था कि इसकी भरपाई जरूर करें। लेकिन,अधिकारियों और वन विभाग के जिम्मेदारों ने इसकी परवाह नहीं की।

सिटी फॉरेस्ट की सौगात का इंतजार
वन विभाग ने हाल के दिनों में शहर में तीन सिटी फॉरेस्ट की सौगात दी है। इसमें तिनकोनिया रेंज की रजही बीट में आरक्षित वन क्षेत्र को सिटी फॉरेस्ट बनाया जाना है। दूसरा नगर वन सूबा बीट में बनेगा। इन दोनों वनक्षेत्रों में सफारी बनेगी। पैदल पाथ वे बनाया जाएगा, जिसमें आम लोग हरियाली के बीच सुबह शाम टहल सकें। चिड़ियाघर के बगल में 160 एकड़ में विनोद वन बना दिया गया है। चूंकि, मामला न्यायालय में लंबित है ऐसे में निर्माण का काम नहीं हो सकता। फिर भी चारों तरफ से जाली बिछाकर अंदर घूमने टहलने का पूरा इंतजाम कर दिया गया।



पिछले वर्षों में वन विभाग के अलावा अन्य सरकारी विभागों की ओर से रोपे गए पौधे
  • वर्ष-18 में 10,97,853 लाख
  • वर्ष-19 में 35,04,511 लाख
  • वर्ष-20 में 21,59,870 लाख
  • वर्ष-21 में 27,48,623 लाख
  • वर्ष 22 में- 31,52,464 लाख

डीएफओ विकास यादव ने कहा कि वन विभाग पौधे रोपने के साथ उन्हें संरक्षित करने की अपील लगातार करता रहा है। विकास कार्य के नाम पर जहां पेड़ काटे गए हैं, वहां हुए नुकसान की भरपाई संबधित संस्था की भी होती है। इसके अलावा अन्य विभागों की ओर से लगाए गए पौधों को संरक्षित रखने की जिम्मेदारी उन्हीं की होती है। कई मामलों में ये इस कार्य में विफल रहे हैं। शहरी क्षेत्र में अधिक से अधिक रोपे गए पौधों को बचाए रखने का विभाग ने हरसंभव प्रयास किया है। ग्रामीण इलाकों में कुछ परेशानी आई है।
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