अगर माता-पिता को ट्यूमर की दिक्कतें हैं तो 80 फीसदी बच्चों में ब्रेन ट्यूमर का खतरा है। अनुवांशिक कारणों में जीन के बदलाव और पैसिव रेडिएशन की वजह से ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में ब्रेन ट्यूमर के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जांच में यह बातें सामने आ रही है कि इनके माता या पिता को ट्यूमर की दिक्कतें रही हैं। ऐसे में यह स्पष्ट हो गया है कि यह अनुवांशिक बीमारी के तौर पर लगातार बढ़ती जा रही है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जन डॉ. सतीश नायक ने बताया कि कॉलेज की ओपीडी में 80 प्रतिशत बच्चों को ट्यूमर अनुवांशिक कारणों से रहा है। बताया कि न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस नामक सिंड्रोम से पीड़ित माता-पिता के बच्चों को ब्रेन ट्यूमर का खतरा 80 फीसदी से अधिक है। इसका असर दूसरी पीढ़ी में साफ दिखता है।
इसके अलावा वॉन हिप्पली-लिंडाऊ, टर्कोट, ली-फ्रॉउमिनी जैसे सिंड्रोम की वजह से भी ब्रेन ट्यूमर होता है। न्यूरो डीएम डॉ. अनुराग कुमार सिंह ने बताया कि सिर में लगातार हो रहा दर्द, चिड़चिड़ापन, लगातार चक्कर आना ब्रेन ट्यूमर के संकेत हो सकते हैं। इसलिए अगर यह लक्षण नजर आते हैं तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। बताया कि कई बार ट्यूमर कैंसर का रूप धारण कर लेते हैं।
यह हैं ट्यूमर के लक्षण
सिरदर्द, आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होना, बोलने में लगातार दिक्कतें बढ़ना, बार-बार उल्टी होना, चलने में परेशानी, हाथ पैर में कमजोरी का अहसास, शरीर सुन्न होना, इसके लक्षण हैं।