महिला दिवस 2020: कोमल मद्धेशिया
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पिता का साया सिर से उठा तो पूरे परिवार की जिम्मेदारी कोमल मद्धेशिया पर आ गई। रिश्तेदारों से कोई खास सपोर्ट नहीं मिला। इसलिए मेडिकल कॉलेज रोड स्थित झुंगिया बाजार की कोमल ने न खुद को हुनरमंद बनाया, बल्कि कई और बालिकाओं को आर्ट-क्रॉफ्ट का प्रशिक्षण देकर अपने पैरों पर खड़े होने योग्य बना दिया।
कोमल करीब आठ साल पहले एक कंपनी से जुड़ीं और आर्ट-क्राफ्ट की ट्रेनिंग ली। हुनरमंद थीं, लिहाजा कंपनी ने उन्हें ट्रेनर की जिम्मेदारी दे दी। आज की तारीख में कम से कम 20 हजार से ज्यादा छात्राओं को आर्ट और क्राफ्ट की ट्रेनिंग दे चुकी हैं।
जिन छात्राओं और लड़कियों को ट्रेनिंग मिली, उनमें से कई ट्रेनर भी बन चुकी हैं। एक कंपनी ने ट्रेनर के रूप में चयन भी किया। इसके एवज में रोजाना 900 रुपये मिल जाते हैं। सामान्य तौर पर महीने में 20 दिन के ट्रेनिंग देने का काम भी मिल जाता है।
ऐसे में कोमल न सिर्फ आत्मनिर्भर बनीं, बल्कि सैकड़ों छात्राओं को हुनरमंद बना चुकी हैं। पांच भाई-बहनों की जिम्मेदारी उन्होंने खुद संभाल ली। खुद की शादी करने की बजाय परिवार की जिम्मेदारी पूरी करने को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। वह छोटी बहन की शादी भी कर चुकी हैं।