फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस बात को लेकर रोज थाने पहुंच रही हैं महिलाएं, पुलिस भी नहीं कर पा रही है मदद

Thu, 14 May 2020 04:13 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

  • शराब के लती खेत तक रख दे रहे रेहन, बढ़ रहा गृह कलह
  • पुलिस के समझाने का भी असर नहीं, घर में कर रहे मारपीट
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पति मजदूरी करत रहलें, लॉकडाउन में काम नाहीं बा, लेकिन रोज शराब पीयत हवें। जउन जमीन रहल उ गिरवी रखकर दस हजार ले लेहलें। साहब! कुछ कार्रवाई करीं। पुलिस दफ्तर में बुधवार को पहुंची सिकरीगंज की मीरा की फरियाद सुनकर पुलिसकर्मी परेशान हो गए कि ऐसे मामलों में वे करें तो क्या करें?

विज्ञापन


पुलिस के मुताबिक लॉकडाउन में इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। मजदूरों को काम नहीं मिल रहा। ऐसे में जो मजदूर शराब के लती हैं, उनके घरों में रोजाना झगड़ा हो रहा है। घर की महिलाएं और बच्चे प्रताड़ना झेल रहे हैं।

पुलिस तक मामला पहुंचता है तो वह आरोपी को थाने लाती है। उसे समझा-बुझाकर घर भेज देते हैं, लेकिन वह शराब पीना नहीं छोड़ता।  कंट्रोल रूम के आंकड़ों के अनुसार, इस तरह की पांच से सात शिकायतें रोजाना मिल रही हैं।
विज्ञापन


पुलिस कई मामलों में घर में हंगामा करने वालों पर 151 के तहत कार्रवाई भी कर रही है, लेकिन इसका डर भी चंद दिन ही रहता है। गृह कलह की वजह से आत्महत्या की कई घटनाएं भी सामने आई हैं। अभी हाल में खुदकुशी के दो मामलों की जांच में वजह शराब ही सामने आई।

विज्ञापन

उदाहरण के लिए ये दो केस हैं...

केस 1. गुलरिहा इलाके के हाफिजनगर में घनश्याम का पत्नी से शराब पीने को लेकर विवाद होता था। शराब के चक्कर में घनश्याम कर्जदार हो गया था। सोमवार की रात उसने खुदकुशी कर ली।
केस 2. 11 मई को पीपीगंज इलाके के जिंदापुर में उमाशंकर ने भी शराब के नशे में आत्मघाती कदम उठा लिया। शराब के लिए पत्नी से विवाद हुआ और फिर उसने फंदे से लटककर खुदकुशी कर ली।

शराब की बिक्री 50 फीसदी गिरी
लॉकडाउन में लंबे समय बाद शराब की दुकानें खुलने पर बिक्री में दो दिन आए उफान के बाद जिले में शराब का कारोबार 50 फीसदी से भी कम हो गया। छूट मिलने के बाद चार मई को रिकार्ड छह करोड़ रुपये की आय भी हुई थी। सामान्य दिनों में एक दिन में दो से ढाई करोड़ की आय होती है, मगर वर्तमान में आय एक करोड़ से भी कम हो गई है।

आबकारी विभाग के मुताबिक जिले में सबसे ज्यादा देशी शराब की  बिक्री (70 फीसदी) होती है। देशी पीने वालों में वह तबका है जो मजदूर, ठेले-खोमचे या रेहड़ी लगाने वाला होता है। लॉकडाउन में कमाई नहीं होने की वजह से दुकानों तक नहीं पहुंच रहे।

जिला आबकारी अधिकारी वीपी सिंह ने बताया कि पहले की तुलना में शराब की बिक्री करीब 50 फीसदी कम हो गई है। बिक्री घटने की जानकारी शासन को दे दी गई है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें