100 प्रतिशत अंक वालों को बोर्ड की वेबसाइट देखकर हटाया
प्रत्येक चरण में ऑनलाइन आवेदन करने पर अभ्यर्थियों की सूची वेबसाइट पर अपलोड हो जाती है। 100 प्रतिशत अंक वालों के नाम उनके परिणाम वाले शिक्षा बोर्ड की वेबसाइट पर देखकर हटा दिया जाता है। इसके बाद अन्य दावेदारों के नाम संबंधित प्रदेश के शिक्षा बोर्ड के पास भेज दिया जाता है। इस बीच नौकरी तो दे दी जाती है, लेकिन सत्यापन की प्रक्रिया चलती रहती है। यदि किसी अभ्यर्थी का शिक्षा प्रमाणपत्र सत्यापन में फर्जी निकलता है, तो उसकी सेवा समाप्त कर दी जाती है।
नियम शर्तों की वजह से नहीं जा पाते न्यायालय
डाकघर में पदों पर चयन के लिए नियम शर्तों के मुताबिक पहले ही तय कर दिया जाता है कि सेवा में आने के बाद अगर शिक्षा प्रमाणपत्र में फर्जीवाड़ा मिला तो सेवा समाप्त कर दी जाएगी। इस वजह से मामला कोर्ट में नहीं जा पाता है।
डाक सेवाएं निदेशक बीबी शरण ने कहा कि डाकघर में पदों पर चयन के लिए सामान्य व्यवस्था है। इंटर में अगर अच्छे नंबर हैं, तो डाकघर की वेबसाइट पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसी का फायदा जालसाज उठाते हैं। फर्जी शिक्षा बोर्ड के प्रमाणपत्र पर आवेदन करते हैं। इनमें प्रथम दृष्टया जो 100 प्रतिशत अंक के साथ आवेदन करते हैं, उन्हें देखते ही किनारे कर दिया जाता है। इसके बाद वालों को उनके पास प्रतिशत के आधार पर ज्वाइन करवा दिया जाता। बाद में स्थानीय स्तर से सभी का सत्यापन किया जाता है। इनमें जिनकी मार्कशीट फर्जी मिलती है, उन्हें बाहर कर दिया जाता है। इस तरह 30 से 40 प्रतिशत तक पद रिक्त रह जाते हैं।