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Gorakhpur News : बाढ़ से घर डूबे तो हार्बर्ट और डोमिनगढ़ बंधे पर बनाया अस्थायी ठिकाना

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बाढ़ से घर डूबे तो हार्बर्ट और डोमिनगढ़ बंधे पर बनाया अस्थायी ठिकाना
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- लोगों ने बांध पर डाल ली झोपड़ी, मवेशियों को भी बांध पर ही रख रहे हैं लोग


अमर उजाला ब्यूरो

गोरखपुर। राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने की वजह से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। घर डूबने के बाद लोगों ने बंधों पर ही शरण ली है। हार्बर्ट बंधे से लेकर डोमिनगढ़ बंधे तक बायीं ओर बाढ़ प्रभावित लोगों की शरण स्थली बन गई है। तिरपाल लगाकर अस्थायी झोपड़ी बना ली है। खेत और बगीचे पहले से ही डूब गए हैं।
शहर से सटे डोमिनगढ़, डिहिवा, सिविरिया, बहरामपुर में बाले मियां का मैदान, बसंतपुर घसियारी, इलाहीबाग आदि जगहों पर बाढ़ का पानी आने से लोग घर छोड़कर बंधे की ओर पलायन कर गए हैं। सबसे ज्यादा स्थिति डोमिनगढ़ की खराब है। यहां लगातार पानी बढ़ने की वजह से लोग अपने मकान छोड़कर सड़क पर रह रहे हैं। सिर्फ रात में निगरानी के लिए घर के कुछ सदस्य आवास पर जा रहे हैं।
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ऊंची जगहों पर भी भर रहा है पानी



उत्तरी कोलिया के इलाके में अब बाढ़ का पानी ऊंची जगहों पर भी पहुंच रहा है। गांवों में निचले क्षेत्र में बसे ग्रामीण घरों में पानी भरने की वजह से सड़क के किनारे दूसरे घरों में आ गए थे। अब जलस्तर बढ़ने की वजह से लोग यहां भी सुरक्षित नहीं हैं। उत्तरी कोलिया के पिन्टू ने बताया कि गांव का घर डूबने के बाद उन्होंने सड़क किनारे प्रधान के घर में शरण ली थी, लेकिन यहां भी पानी भर रहा है। लगता है अब इसे छोड़कर बंधे पर ही जाना होगा। हार्बर्ट बंधे के पास नरसिंहपुर के निचले हिस्से में सैकड़ों लोग मकान बनवा कर रहते हैं। राप्ती नदी के बाढ़ का पानी मकानों में भरता ही जा रहा है जिसकी वजह से लोग घर छोड़कर बांध पर आ गए हैं। बांध पर पॉलिथीन घेर कर रह रही सुमित्रा ने बताया कि मैं और मेरा एक बेटा (आन्नद) परिवार सहित बांध पर रह रहे हैं जबकि जबकि छोटा बेटा रोहित परिवार के साथ छह दिन पहले ननिहाल चला गया है। वह तब से वहीं रह रहा है।


खेती की सब्जी में डूब गए लाखों रुपए



हाबर्ड बांध के पास स्थित बसंतपुर घसियारी मोहल्ले में राप्ती नदी के तट के करीब लोग 20 बीघा से अधिक की जमीन में सब्जियों की खेती करते हैं। बाढ़ के पानी में सब्जियों के खेत और बगीचे डूब गए हैं। मोनू ने बताया कि मेरे पिता 5 भाई हैं और सभी 1.25 एकड़ खेत में सब्जियों की खेती करते हैं। बाढ़ के कारण खेती डूब चुकी है। इसमें हमारा लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। इसी मोहल्ले के पन्ना लाल, देवकनन्दन, अवधेश साहनी, अशोक कुमार के भी खेत और घर डूब गए हैं। उत्तरी कोलिया के रूदल निषाद ने बताया कि उन्होंने खेत में खेत में सब्जियां बोई थीं। बाढ़ आने से दो लाख से अधिक की फसल डूबकर नष्ट हो गई है।
48 गांव अब तक बाढ़ की चपेट में
राप्ती नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या सोमवार को 48 हो गई। जबकि कुल प्रभावित क्षेत्रफल 1881 हेक्टेयर और कुल आबादी की संख्या 60,235 हो गई है। लगातार पानी बढ़ने के चलते अभी अनुमान लगाया जा रहा है कि मंगलवार को कुछ और गांव बाढ़ की जद में आ सकते हैं।
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उधर, सोमवार को प्रशासन की ओर से शेरगढ़, खिरवनिया व झरवां में 680 राहत खाद्यान्न सामाग्री किट का वितरण किया गया है। साथ ही बहरामपुर उत्तरी और दक्षिणी में 3,800 लंच पैकेट बांटा गया। प्रशासन की ओर से अन्य सुविधाएं भी बाढ़ प्रभावितों को उपलब्ध करवाई जा रही हैं। लगातार अधिकारी निगरानी कर रहे हैं।
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