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नेपाल में जलप्रलय: देवीघाट में स्कूल गए दो बच्चे लौटे, मां बोली- सब मिल गया; भूल गई घर उजड़ने का दर्द

Wed, 02 Sep 2026 03:02 PM IST
Rohit Singh अमर उजाला ब्यूरो, देवीघाट/नेपाल

सार

जलप्रलय से आई त्रासदी में देवीघाट के मासूम गौरव मिर्जा की जिंदगी वीरान हो गई है। सिर से मां का साया पहले ही हट चुका था अब दिव्यांग पिता भी नदी की तेज धारा में बह गए। अनाथ गौरव इस समय राहत शिविर में है। सूचना पाकर नुवाकोट से उनके चाचा नूरी मिर्जा आए हैं।
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देवीघाट में स्कूल गए दो दो मासूम 4 दिन बाद लौटे तो मां घर बहने का दर्द भूल गई - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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चारों तरफ मची तबाही और सबकुछ खो देने के गम के बीच मंगलवार को एक घर से आ रही रोने की आवाज में एक उम्मीद थी..., घर के लोगों की आंखों से बह रहे आंसुओं में खुशी छिपी थी। ये आवाज और ये आंसू मां और बच्चों के सुखद मिलन की गवाही दे रहे थे।
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नेपाल में जलप्रलय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अमर उजाला की टीम उस घर की ओर पहुंची तो लोगों ने बताया कि जलप्रलय में लापता हुए दो मासूमों को सेना के जवान लेकर आएं हैं। घर उजड़ने का गम मां भूल गई कहा कि बच्चे मिल गए तो सब मिल गया। देवीघाट निवासी अनीता ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि जिस दिन जलप्रलय आया दोनों बच्चे नदी के दूसरी ओर स्थित स्कूल गए थे।

नेपाल में जलप्रलय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुल बह गया। बिजली भी गुल हो गई जिससे गांव से संपर्क पूरी तरह टूट गया। बच्चे लौटे नहीं और हम उन्हें तलाश करने नहीं जा सके। आज सेना के जवान उन्हें लेकर आए हैं। अनीता बोलीं, घर चला गया तो फिर बना लेंगे लेकिन बच्चे सुरक्षित लौट आए, यही सबसे बड़ी बात है।

नेपाल में जलप्रलय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बहन सपना ने बताया कि भाई को राखी भी बांध नहीं पाई। कुछ पता नहीं चल रहा था लेकिन सेना से पता चला कि वे बच्चों को लेकर आ रहे हैं। यह सूचना मेरे जीवन के लिए हमेशा यादगार रहेगी...यह कहते ही उनकी आंखें नम हो गईं।

नूरी मिर्जा व गौरव - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नदी में बह गए दिव्यांग पिता...गौरव का अब कोई नहीं
जलप्रलय से आई त्रासदी में देवीघाट के मासूम गौरव मिर्जा की जिंदगी वीरान हो गई है। सिर से मां का साया पहले ही हट चुका था अब दिव्यांग पिता भी नदी की तेज धारा में बह गए। अनाथ गौरव इस समय राहत शिविर में है। सूचना पाकर नुवाकोट से उनके चाचा नूरी मिर्जा आए हैं।
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बोले, मैं पिता की तरह बच्चे को रखूंगा...इतना कहते ही वे भावुक हो गए। गौरव ने बताया कि वे स्कूल में थे, घर आए तो तबाही थी, मुझे पहले ही रोक लिया गया। बाद में पता चला कि घर नदी में बह गया और पापा भी।
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