2019 में भी एचटूएस के जरिए गांवों में पेजलय की शुद्धता की जांच हो चुकी है। करीब दो हजार राजस्व गांवों की जांच में 200 में पानी पीने लायक नहीं मिला था। उनमें से कई गांवों में हैंडपंप रीबोर कराए गए थे और ब्लीचिंग पाउडर व लाल दवा डाली गई थी।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर का कहना है कि गांवों में पेयजल की शुद्धता की जांच की जानी है। प्रथम चरण में 2000 वायल मिले हैं, इससे कोरोना एवं इंसेफेलाइटिस से प्रभावित 200 गांवों में जांच की जा रही है। हर गांव में 10 वायल दिए गए हैं और वहां 10-10 जल स्रोतों की जांच होगी। 31 मई को रिपोर्ट आ जाने की संभावना है, उसके बाद पेयजल को शुद्ध बनाने के उपाय किए जाएंगे।