आरोप है कि बीएलओ अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाना चाहता है। पिछले पंचायत चुनाव में वह ग्राम प्रधान पद का प्रत्याशी भी रह चुका है। बीएलओ द्वारा अपने मजरे के तीन वार्ड से करीब चार सौ नए मतदाताओं का नाम निर्वाचक नामावली में जोड़ दिया गया है। जिसमें कई नाम पड़ोसी गांव व पड़ोसी प्रांत बिहार के भी हैं।
इसके बाद ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बीते सप्ताह आरोपी बीएलओ लोकमान अंसारी को हटाकर दूसरे को बीएलओ बना दिया था। जांच के दौरान यह बात सामने आयी थी कि पूर्व बीएलओ ने फर्जी आधार नंबर व नाम-पते से जो मतदाता बनाए हैं उसमें से कई छठीं व सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे हैं।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कसया पूर्ण वोरा ने बताया कि मामले की जानकारी तीन दिन पहले हुई थी। शिकायतों की ब्लाक व राजस्व कर्मियों से जांच कराई गई है। जांच के दौरान आरोप सही पाए गए। तत्कालीन बीएलओ को बर्खास्त करने और केस दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।
एडीओ पंचायत मजरूल हक ने बताया कि इस मामले में वरिष्ठ अफसरों के निर्देश पर उनकी अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनी है। कमेटी जल्द जांच कर अगली कार्रवाई के लिए रिपोर्ट अफसरों को भेजेगी।