बैरियर का निरीक्षण करते पुलिस अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां निचलौल थाना क्षेत्र के इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटे गांव बहुआर के ग्रामीणों ने मुख्य मार्ग के करीब श्मशान घाट पर बैरियर लगा दिया है। इसके चलते लोग मजबूर होकर शव दाह संस्कार के लिए करीब पांच किलोमीटर दूर गंडक नदी के किनारे पथलहवा घाट पर जाते हैं।
बैरियर लगाने वाले ग्रामीणों का आरोप है कि घाट पर बड़ी संख्या में शव जलाया जा रहा था। बहुआर गांव निवासी राजेश प्रसाद, तैयब अली, गुलाब सेठ, श्रीकिशुन यादव, भरत पासवान, सुदर्शन ने कहा कि तेरह चार पुल से जाने वाली टेल फॉल नहर के किनारे श्मशान घाट है, जो गांव की आबादी से काफी नजदीक है।
पहले इस घाट पर रोज दो-चार शव जलाया जा रहा था, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के चलते ही इस घाट पर प्रतिदिन 20 से 25 शव जलाया जाने लगा। कुछ शव को पूर्ण रूप से जलने से पहले लोग लौट जा रहे थे। इसके चलते गांव का वातावरण खराब हो रहा था। संक्रमित मरीजों का शव जलाने से ग्रामीणों में भय बना हुआ था।
ग्राम प्रधान राधेश्याम यादव का कहना है कि इसकी शिकायत पुलिस से कई बार की गई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसके बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए श्मशान घाट की तरफ जाने वाली मुख्य मार्ग पर खुद बैरियर लगा दिया गया।
इस संबंध में एसडीएम राम सजीवन मौर्य ने कहा कि अभी मामला संज्ञान में आया है। मौके पर पुलिस टीम को भेज बैरियर लगाने का कारण जानने के बाद बैरियर को हटवा दिया जाएगा।