गोरखपुर। भोजपुरी भाषा के सम्मान, विकास, स्वाभिमान और संरक्षण को समर्पित ''''यायावरी भोजपुरी महोत्सव-2026'''' का आयोजन सोमवार को सिविल लाइंस स्थित एक अतिथि गृह में किया गया। इसमें साहित्य जगत के दिग्गज जुटे। लोकगायक एवं पद्मश्री भरत सिंह भारती को ''''यायावरी शिखर सम्मान'''' से सम्मानित किया गया।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रकाश उदय ने कहा कि तकनीक से जुड़कर भोजपुरी और समृद्ध हुई है। तकनीक के कारण अब इसको लिखा और पढ़ा जाना सरल व सहज हो गया है। इससे इस क्षेत्र में लेखक और पाठकों की संख्या बढ़ी है। भरत सिंह भारती ने इस पुरस्कार के लिए यायावरी परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।
विशिष्ट अतिथि पूर्व आईपीएस व वरिष्ठ साहित्यकार त्रिलोक नाथ पांडेय ने सेवा के दौरान भाषा के रूप में भोजपुरी के प्रयोग और चुनौतियों के बारे में बताया। इस मौके पर ब्रजेश्वर मणि त्रिपाठी आदि मंचासीन रहे।
अन्य सत्रों में भी साहित्यकारों ने विचार रखे। गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रो. विमलेश मिश्र ने भाषा के विकास के लिए भोजपुरी शिल्प की मौलिकता को कायम रखने पर जोर दिया। डॉ. रंजन त्रिपाठी, विंग कमांडर अश्विनी दूबे, डॉ. शिरीष पाठक ने भोजपुरी दुनिया में क्षेत्र से निकले प्रवुद्ध वर्ग को भोजपुरी के विकास में सहयोग करने की अपील की।
भोजपुरिया माटी के आधी दुनिया सत्र में अमिता तिवारी, दिव्या सिंह, डॉ. क्षमा त्रिपाठी ने महिलाओं के भोजपुरी भाषा में बढ़ती भागीदारी की बातें कहीं। त्रिलोक नाथ, प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा, विमल चंद्र पांडेय ने भी विचार रखे। अंत में राम भजन संध्या का आयोजन किया गया। इसमें लोक गायिका चंदन तिवारी ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
पटकथा के अनुसार करनी होती है गीत की रचना
एक अन्य सत्र ''''मनोरंजन की दुनिया में पुरबी बयार'''' में चर्चित वेब सीरीज ''''खाकी : द बिहार चैप्टर'''' में गीत लिखने वाले गीतकार डॉ. सागर ने कहा कि पटकथा के अनुसार ही गीत की रचना करनी पड़ती है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मुन्ना पांडेय से बातचीत में उन्होंने विचार रखे। आदित्य राजन ने कहा कि हमारी मातृ भाषा भोजपुरी में लोक चेतना साफ झलकती है। फूलचंद गुप्ता ने कहा कि गांव में लोक कथा का विशेष महत्व है।