टीवी पर देखते थे। कभी सोचा नहीं था कि लाल किले पर प्रधानमंत्री के सामने वीआईपी दीर्घा में बैठकर स्वतंत्रता दिवस समारोह का साक्षी बनने का मौका मिलेगा। मगर ‘बाबाजी’ (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ) की वजह से यह सपना साकार हो गया। यह सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, समूचे वनटांगिया समुदाय के लिए ऐतिहासिक पल रहा। ‘बाबाजी’ के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द ही नहीं बचे हैं।
भावों की यह अभिव्यक्ति है वनटांगिया मुखिया रामगणेश की। लालकिले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में यूपी से गए दस खास मेहमानों में शामिल रामगणेश सोमवार को अपने वनटांगिया गांव जंगल तिकोनिया नम्बर तीन लौट आए। पीएम मोदी के मंच के सामने वीआईपी दीर्घा में बैठने के पल को आंखों में संजोए रामगणेश पूरे दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए नहीं थके। वे कहते हैं कि वनटांगियों को जंगल से निकालकर आम लोगों की जिंदगी से उन्होंने ही जोड़ा। उन्होंने हमें मूलभूत अधिकार दिए, शहर जैसी सुविधाएं दीं। अब पीएम के मंच के सामने अति विशिष्ट व्यक्ति बनवाकर सभी वनटांगियों को गौरवान्वित किया है।
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दिल्ली से लौटे वनटांगिया रामगणेश।
- फोटो : अमर उजाला।
वनटांगिया गांव से निकलकर दिल्ली के लालकिले के सामने आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह तक की अपनी यात्रा को साझा करते हुए वनटांगिया रामगणेश ने बताया कि वे 13 अगस्त को ट्रेन से नई दिल्ली रवाना हुए थे। 14 अगस्त को पहुंचने पर उन्हें ससम्मान यूपी भवन में ठहराया गया। 15 अगस्त को प्रात:काल यूपी सरकार के वाहन से लालकिले पहुंचे और वीआईपी दीर्घा में बैठकर स्वतंत्रता दिवस समारोह के साक्षी बने।
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रामगणेश
- फोटो : अमर उजाला।
रामगणेश को देख जुट गई वनटांगियों की भीड़
सोमवार को जैसे ही रामगणेश अपने गांव जंगल तिनकोनिया नंबर तीन पहुंचे, उनके यात्रा संस्मरण को सुनने के लिए भीड़ जुट गई। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने उन्हें घेर लिया।
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सीएम योगी आदित्यनाथ व रामगणेश।
- फोटो : अमर उजाला।
रामगणेश ने भी विस्तार से अपने सफर को साझा किया और बीच-बीच में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करना नहीं भूले। बातचीत में उन्होंने कहा कि देश को आजादी भले ही 1947 में ही मिल गई थी, लेकिन वनटांगिया अपने बसावट काल 1918 से लेकर 2017 तक गुलामी की ही दशा में रहे।
वनटांगियों के साथ सीएम योगी।(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
उन्हें तो वास्तविक आजादी तब मिली जब ‘बाबाजी’ (योगी आदित्यनाथ) मुख्यमंत्री बने। यह कहते हुए रामगणेश भावुक हो गए। कुछ क्षण की चुप्पी के बाद बोले जब हम आजाद ही नहीं थे तो आजादी के जश्न में शामिल होने की बात सपने में भी नहीं आती थी। मुख्यमंत्री ने सुध नहीं ली होती तो वनटांगिए अभी भी तमाम सुविधाओं से वंचित ही रहते। आज हम समाज व विकास की मुख्यधारा में शामिल होकर बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं तो इसका एकमात्र श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है। बता दें कि लालकिले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रदेश से जिन दस लोगों को विशेष अतिथि के रूप में बुलाया गया था, उनमें वनटांगियों की नुमाइंदगी रामगणेश ने की।