सवाल : गोरखपुर स्टेशन के भवन का सुंदरीकरण और कुछ नई सुविधाएं शुरू करने की योजना भी है क्या?
जवाब: देखिए, गोरखपुर स्टेशन का भवन एक ऐतिहासिक है। यह 1885 में बना था। इसके लुक में कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। लेकिन, सुंदरता और भव्यता कैसे निखरेगी, इसके लिए योजना तैयार की जा रही है। स्टेशन के यार्ड और परिसर में खाली जगह पर होटल, व्यावसायिक कांप्लेक्स बनाने की भी योजना है। इसके लिए रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) से बातचीत चल रही है। डिजाइन भी मांगी गई है। इससे यात्री को जरूरत का सामान खरीदने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। ठहरने से लेकर खानपान की बेहतर सुविधा मिलेगी।
सवाल : पदभार संभालने के बाद सबसे बड़ी चुनौती आपके सामने क्या आई?
जवाब : विभिन्न रेलखंडों पर रेल दोहरीकरण और आमान परिवर्तन को समय से पूरा कराना बड़ी चुनौती है। कोरोना संक्रमण में कार्य की प्रगति धीमी रही। मेरा प्रयास है कि निर्धारित समय से पहले काम पूरा करा लूं। जितनी जल्दी परियोजाएं पूरी होंगी, यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
सवाल : कोई ऐसी नई रेल लाइन प्राथमिकता में हो, जिससे सहूलित ज्यादा मिले
जवाब : आनंदनगर से घुघली रेल लाइन का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। अगर यह लाइन बन जाए तो गोरखपुर जंक्शन पर मालगाड़ी को लोड कम हो जाएगा। वहीं, ट्रेनों को चलाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध होगा। मेरी कोशिश है कि इस रेलवे लाइन को स्वीकृति मिल जाए।
सवाल : कौन-कौन से योजनाएं विशेष प्राथमिकताओं में है?
जवाब : औंडिहार-बलिया, बलिया-छपरा, वाराणसी-झूंसी-इलाहाबाद, डालीगंज-मल्हौर रेल दोहरीकरण, ऐशबाग-मानकनगर बाईपास लाइन, कुसम्ही से डोमिनगढ़ तीसरी लाइन और सहजनवां-दोहरीघाट व खलीलाबाद-बहराइच नई रेल लाइन का निर्माण प्राथमिकता में है। इसकी नियमित मानीटरिंग हो रही है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद ट्रेनों का संचालन आसान हो जाएगा। समय पालन में सुधार होगा।