अध्ययन: युवाओं में बढ़ रहा हाइपरटेंशन, एम्स के डॉ. यू वेंकटेश के सर्वे और नेशनल फैमिली हेल्थ की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
15-49 वर्ष के बीच की उम्र की 17.2 प्रतिशत आबादी हाइपरटेंशन की चपेट में
8,03,211 लोगों के बीच हाइपरटेंशन पर हुआ था सर्वे
गोरखपुर। आमतौर पर युवावस्था को जीवन का सबसे बेफिक्र और ऊर्जावान दौर माना जाता है लेकिन हालिया सर्वे और स्वास्थ्य रिपोर्ट्स इस धारणा को चुनौती दे रही हैं। देश में 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं में हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) तेजी से बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय बनता जा रहा है। आज के शहरी युवाओं की जीवनशैली में देर रात तक जागना, फास्ट फूड का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और डिजिटल उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी शामिल है। इसके अलावा सामाजिक और व्यक्तिगत कारण भी जिम्मेदार हैं।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे और एम्स के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. यू वेंकटेश की ओर से किए गए एक विस्तृत अध्ययन के अनुसार, इस आयु वर्ग की 17.2 प्रतिशत आबादी हाइपरटेंशन से प्रभावित है। यह अध्ययन देशभर में 8,03,211 लोगों पर आधारित था, जिसमें 87 प्रतिशत महिलाएं और 13 प्रतिशत पुरुष शामिल थे। सर्वे में 70 प्रतिशत ग्रामीण और 30 प्रतिशत शहरी आबादी को शामिल किया गया।
रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि शहरी युवाओं में हाइपरटेंशन की समस्या ग्रामीण युवाओं की तुलना में अधिक गंभीर है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 15.5 प्रतिशत है, वहीं शहरी युवाओं में बढ़कर 18.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
डॉ. यू वेंकटेश के अनुसार, आज के शहरी युवाओं की जीवनशैली में देर रात तक जागना, फास्ट फूड का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और डिजिटल उपकरणों पर अत्यधिक निर्भरता, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी शामिल है। इसके अलावा सामाजिक और व्यक्तिगत कारण भी जिम्मेदार हैं।
लिंग के आधार पर भी हाइपरटेंशन के आंकड़ों में अंतर देखा गया है। पुरुषों में इसका प्रतिशत 18.2, जबकि महिलाओं में 16.1 पाया गया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हरियाणा के युवा सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहां हाइपरटेंशन की दर 32.25 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुना है, जो क्षेत्रीय असमानताओं की ओर भी इशारा करता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में हाइपरटेंशन के मामलों में लगभग पांच प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है। डॉ. वेंकटेश ने कहा कि यदि सही समय पर जागरूकता बढ़ाई जाए और निवारक उपाय अपनाए जाएं तो हाइपरटेंशन जैसी गंभीर समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।