गोरखपुर के रोहिंग्या प्रकरण में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस की सख्ती के बाद 20 झोपड़ी डालकर रह रहे करीब 40 लोगों ने ठिकाना बदल लिया है। कहां गए हैं, किसी को पता नहीं है।
गोरखपुर के पिपराइच में रोहिंग्या प्रकरण की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रेलवे स्टेशन के पास स्थित खाली जमीन पर झोपड़ी बनाकर रहने वाले लोगों के बच्चे उर्दू पढ़ते थे। वहां पर एक जगह जिम बना मिला है, जहां पर जुगाड़ से बने डंबल, सीमेंट से बना गदा, बेंच, चेस्ट और विंग्स के लिए भी हाथ से उपकरण बनाए गए हैं।
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सड़क पर भीख मांगकर खाने वाले घर आकर जिम करते थे, यह देखकर हर कोई हैरान है। जब इन पर रोहिंग्या होने का आरोप लगा तब वे आनन-फानन वहां से भाग गए। आस-पास के लोगों ने बताया कि सख्ती बढ़ने पर ऑटो से सभी भाग निकले हैं। अभी उनके नए ठिकाने का पता नहीं चला है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है।
पिपराइच के रेलवे स्टेशन के पास खाली जमीन पर कब्जा करके करीब 20 झोपड़ियां बनाकर लगभग 40 लोगों का परिवार रहा था। बुधवार को अमर उजाला टीम वहां पहुंची। खाली जमीन पर 5-6 झोपड़िया बनीं हुई थीं।
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वहीं कई झोपड़ियां उजड़ी पड़ी थीं। एक झोपड़ी में प्रवेश करने पर बच्चों की लिखी कॉपियां मिलीं, जिससे पता चला कि ये उर्दू की पढ़ाई कर रहे थे। एक व्यक्ति ने बताया कि यहां पास में ही एक स्कूल है, जहां पर रात के समय ये बच्चे पढ़ने जाते थे।
पास के गांव में रहने वाले युवक पर लगाया आरोप
रेलवे स्टेशन के आस-पास रहने वाले लोगों ने बताया कि दो साल पहले पास के गांव में रहने वाले एक युवक ने यहां लाकर लोगों को बसाया था। उसका यहां हमेशा आना-जाना लगा रहता था। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि वोट की खातिर भी इनका इस्तेमाल किया जा रहा था। लोगों का कहना है कि युवक की गतिविधियां ठीक नहीं लगती हैं। वह संदिग्ध लगता है। उससे कड़ाई से पूछताछ हो तो वह हकीकत बता सकता है।
पांच नामजद व 50 अज्ञात रोहिंग्या पर दर्ज है केस
नगर पंचायत की पूर्व अध्यक्ष अनुपमा आर्या ने रविवार को पांच नामजद और 50 अज्ञात रोहिंग्या के विरुद्ध पिपराइच थाने में मारपीट व जानलेवा हमला करने का केस दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि भूमि विवाद में रोहिंग्या की मदद से उनके ऊपर जानलेवा हमला किया गया। मामला सामने आने के बाद एलआईयू, एटीएस और अन्य सुरक्षा एजेंसी सक्रिय हो गईं और मौके पर पहुंचकर पूछताछ व जांच शुरू कर दी।
दिलाया जा रहा था योजनाओं का लाभ
झोपड़ियों के अंदर से कई महिला और पुरुष की पासपोर्ट साइज की 5-5 फोटो अलग-अलग कागज के पैकेट में मिले हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि इन लोगों को किसी की मिलीभगत से सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा था। ऐसे कई और कागजात भी वहां मिले हैं।
झूठा पत्र बनाकर मांगते थे रुपये
एक झोपड़ी में से एक प्लास्टिक चढ़ा पत्र मिला है। जिस पर लिखा है-मैं शकीला देवरिया की रहने वाली हूं। पिता का पैर टूट गया है, घर में कोई और नहीं है, जो परिवार की देखभाल कर सके। इसलिए आप लोगों से अनुरोध है कि मेरी मदद करें। बताया जा रहा है कि यह झूठा पत्र बनवाकर स्टेशन के आस-पास उसे दिखाकर भीख मांगते थे। अधिक रुपये जेब से निकलवाने के लिए पत्र का इस्तेमाल किया जा रहा था।
बच्ची के हाथ से बनाई तस्वीर ने उठाए सवाल?
एक झोपड़ी से परीक्षा में कॉपी रखकर लिखने वाला एक पैड मिला है। उसमें किसी बच्ची ने हैरान कर देने वाली तस्वीर बनाई है। पेंसिल से एक लड़की का चेहरा बनाया है, उसके हाथ पैर नहीं हैं। बगल में नौ रॉड लगीं एक सलाखें बनाई गई हैं। इससे होकर एक लाइन बाहर की तरफ खींची है। यह तस्वीर देखने के बाद मनोवैज्ञानिक डॉ. आकृति पांडेय ने बताया कि इसके जरिये कोई बच्ची कुछ कहना चाह रही है।
झोपड़ी में रहने वालों के साथ कोई एक बच्ची है, जो कैद में है, वहां से वह आजाद होना चाहती है। इसलिए ऐसा चित्र उसने बनाया है। कोई भी नार्मल इंसान बिना सोचे समझे ऐसी तस्वीर नहीं बना सकता है। फिलहाल वहां रहने वाले कहां गए, अब इसके बारे में किसी को पता नहीं है। पुलिस को भी अब उनकी तलाश नहीं है।