सोमवार को हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कई बूथों की अव्यवस्था डरावनी थी। गांव में सरकार चुनने के उत्साह में लोग कोरोना को भूल चुके थे। कई बिना मास्क के कतार में खड़े दिखे तो ज्यादातर जगहों पर धक्का-मुक्की का आलम रहा। व्यवस्था संभालने के लिए तैनात पुलिसकर्मी भीड़ के आगे वेबस थे। बूथों पर मास्क और सैनिटाइजर का इंतजाम नदारद था।
जिले में हर रोज एक न एक व्यक्ति की कोरोना से मौत हो रही है। ढाई सौ से अधिक लोग हर दिन संक्रमित हो रहे हैं। अस्पताल में मरीजों को बेड नहीं मिल रहा। ऑक्सीजन के लिए हर ओर हाहाकार मचा हुआ है। इतना सब होने के बावजूद चुनाव में न लोगों में कोरोना का खौफ दिखा न ही प्रशासन को इसकी चिंता रही।
शादी समारोह में कोविड-19 गाइडलाइन का हवाला देने वाला जिला प्रशासन चुनाव में अपने ही कायदे कानून को भूल गया। कतार में खड़े मतदाताओं की थर्मल स्क्रीनिंग तो दूर उनके हाथ सैनिटाइज करने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं थी। बिना मास्क लगाए लोग मतदान करके निकल रहे थे।
दो गज की दूरी का पालन कराने में भी अमला नाकाम रहा। सदर ब्लाक के बूथ संख्या 158, 159, व 160 पर कोविड नियमों धज्जियां उड़ी। गौरीबाजार क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय हरेरामपुर में मतदाता घंटो लाइन में खड़े रहकर धक्का-मुक्की करते रहे। यही हाल भाटपाररानी ब्लाक के टीकमपार, देसही देवरिया के प्राथमिक विद्यालय कौलाछापर आदि जगहों का रहा।