गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में अनोखे मामले सामने आ रहे हैं। पति-पत्नी एक-दूसरे पर शक कर रहे हैं। रिश्तों में खटास आ रही है। घर से निकलते ही पत्नी पूछती है- किसके साथ हो, वीडियो कॉल करो।
गोरखपुर के सूरजकुंड निवासी प्राइवेट जॉब करने वाले एक व्यक्ति पत्नी से परेशान हैं। उनका कहना है कि घर से निकलने के बाद ही उनकी पत्नी कॉल करने लगती है। पूछती है कि किसके साथ हो, तुरंत वीडियो कॉल करके दिखाओ। हर पांच मिनट पर कॉल करके परेशान कर देती है।
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इतना ही नहीं, उसे यह भी शक रहता है कि वह उसे मार देगा। परेशान होकर वह बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में पहुंचे और डॉक्टर को पूरी कहानी बताई।
इसी तरह महराजगंज की एक महिला अपने पति से परेशान है। उनके पति इतना शक करते हैं कि हमेशा फोन चेक करते रहते हैं। किसी से भी बात नहीं करने देते। शक के चलते नौकरी तक छुड़वा दी। यहां तक कि घर से निकलते समय दरवाजे को बाहर से लॉक कर देते हैं। दिनभर वह घर में ही पड़ी रहती हैं। तंग आकर मनोचिकित्सक के पास पहुंची।
यह दो केस महज उदाहरण के लिए हैं। इस तरह के मामले रोजाना मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। पति-पत्नी के रिश्तों में दरार और एक-दूसरे पर शक करने की आदत काफी बढ़ गई है। नतीजा यह है कि उन्हें काउंसिलिंग की जरूरत पड़ रही है।
इस तरह के मामलों में काउंसिलिंग करना भी काफी मुश्किल होता है क्योंकि मरीज सीधे डॉक्टर के पास नहीं आता और बिना उसकी सहमति के उसे दवाइयां नहीं दी जा सकतीं। इस तरह के मरीज दिखने में सामान्य होते हैं और दूसरे लोगों से भी सामान्य व्यवहार ही करते हैं। ऐसे में उनकी बीमारी आसानी से पकड़ में नहीं आती।
हर हफ्ते आ रहे 10 से 15 मरीज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की ओपीडी में रोजाना करीब 150 मरीज आते हैं। विभाग के डॉ. तापस आइच के अनुसार, डेल्यूजनल डिसऑर्डर (भ्रम संबंधी विकार) के मामले हफ्ते में 10 से 15 आ जाते हैं। ऐसे मरीजों के इलाज के लिए पहले जिला मेंटल हेल्थ रिव्यू बोर्ड से इजाजत लेनी होती है। दरअसल, मरीजों को शक होता है कि उनके परिजन उनके खाने में जहर मिलाकर दे सकते हैं, इस वजह से परिजन के कहने पर डॉक्टर तुरंत दवा नहीं लिखते। बोर्ड से अनुमति मिलने के बाद ही ऐसे मरीजों का उपचार शुरू होता है।
महिला थाने में भी होती है काउंसिलिंग
एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने बताया कि पति-पत्नी में विवाद के मामले महिला थाने तक भी पहुंच रहे हैं। यहां रोजाना आठ से 10 मामले पहुंचते हैं। इसके बाद इनकी काउंसिलिंग कराई जाती है। ज्यादातर मामलों में उन्हें एक-दूसरे पर शक रहता है।
ओपीडी में इस तरह के कई मामले आते हैं जिनमें लोगों को शक की बीमारी रहती है। डेल्यूजनल डिसऑर्डर एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जिसमें व्यक्ति ऐसे दृढ़ और गलत विश्वास रखता है जो वास्तविकता से मेल नहीं खाते। मरीज अपनी बात पर अत्यधिक निश्चित रहता है, भले ही प्रमाण इसके विपरीत हों। यह सोच व्यवहार और सामाजिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। समय पर पहचान और इलाज से मरीज की स्थिति में सुधार संभव है और जीवन सामान्य किया जा सकता है।- डॉ. तापस आइच, मनोरोग विभाग, बीआरडी मेडिकल कॉलेज