दीर्घकालीन अवधि में दिखेगा बजट का फायदा
इनकम टैक्स में नए स्लैब और घटी हुई दरें करदाताओं के लिए ठीक हैं। क्यों कि अब 80 सी और 80 जी के कागजात दिखाने का झंझट नहीं और आपको पूर्व की अपेक्षा कुछ करभार कम भी हो सकता है। कॉरपोरेट जगत के लिए डीडीटी को खत्म करना एक बेहतर कदम है। हालांकि शेयर बाजार को लांग टर्म कैपिटल गेन खत्म करने की बड़ी आशा थी जिसे सरकार ने उस तेजी से नहीं किया इसलिए बाजार डाउन हो गया। अपील में फेसलेस अपील एवं वीडीआईएस एक नई शुरुआत है। एलआईसी के आईपीओ और आईडीबीआई के डिसइनवेस्टमेंट से भी अच्छा पैसे आने की उम्मीद है।
माइक्रो इकोनॉमी के हिसाब से यह बजट अच्छा है। कृषि के सप्लाई चेन के लिए जिस तरह से वेयरहाउस ब्लॉक और ग्राम स्तर पर बनाए जाएंगे, फि र इसे कृषि उड़ान और कृषि रेल से जोड़ा जाएगा। यह कृषि अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बदल देगा। नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी पूरे देश में मांग एवं आपूर्ति के संतुलन को बनाते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के साथ जीडीपी को भी बढ़ाएगी। नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी एक बड़ा डेटा बेस होगा और रोजगार दिलाने का मास्टर स्ट्रोक होगा। एमएसएमई के लिए जिस तरह से एनपीए और ऋ ण पुनर्गठन को आगे खिसकाया गया है वह उन्हें राहत पहुंचाएगा। ऑडिट की लिमिट को पांच करोड़ करने और जीएसटी रिटर्न का सरलीकरण भी इज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ाएगा।
पंकज जायसवाल, सीए एवं आर्थिक विशेषज्ञ
देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने की झलक नजर आती है
कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना, शिक्षा स्वास्थ्य, महिलाएं अनुसूचित जाति एवं जनजाति, पिछड़े वर्ग सबको साथ लेते हुए विकास की मुख्यधारा में लाकर देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने का संकल्प इस बजट से साफ दिखता है। कृषि के लिए 16 सूत्री कार्यक्रम के तहत किसान रेल, किसान उड़ान, कुसुम योजना, धनलक्ष्मी योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, एक जिला एक प्रोडक्ट, ब्लू इकॉनमी, सिंचाई योजनाएं, जैविक खेती, ऑनलाइन कृषि मंडी आदि योजनाओं से किसानों की स्थिति और सुदृढ़ होगी।
शिक्षा क्षेत्र में उच्च शिक्षा संस्थानों में अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम, कौशल विकास योजना, स्टडी इन इंडिया प्रोग्राम, ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम हर जिले में मेडिकल कॉलेज ए क्वांटम क्लाउड्स, जेनेटिक मैप से युवाओं को स्वावलंबी बनाने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में इंद्रधनुष योजना, टीबी मुक्त भारत। रियल स्टेट को प्रमोट करने के लिए विभिन्न योजनाओं की घोषणा जिससे कि सभी को घर उपलब्ध हो सके। इन सभी के साथ-साथ छोटे आय समूह के लोगों को तथा मध्यम वर्ग के लोगों को आयकर में छूट देकर बेहतरीन प्रयास किया गया है।
आधारभूत संरचना के विकास के लिए व्यापक उपाय किए गए हैं। वास्तव में सरकार पारदर्शिता, ईमानदारी को प्रोत्साहित करने के लिए चार्टर लाने का संकल्प लिया है । यही नहीं डिजिटलाइजेशन को पहचान मिले, इसके लिए भी सरकार कटिबद्ध है। सरकार चाहती है, सभी वर्ग मजबूती के साथ अर्थव्यवस्था के विकास के भागीदार बने इसीलिए महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग के लोगों के कल्याण लिए भी बजट में आवंटन किया गया है।
प्रो. संजीत कुमार, वाणिज्य विभाग गोरखपुर विश्वविद्यालय
बजट में सेवा क्षेत्र, निवेश और निर्यात वृद्धि का नहीं है कोई रोडमैप
बजट में कृषि, सिंचाई, ग्रामीण विकास सुविधाओं को बढ़ाने के प्रावधान हैं। इनसे संबंधित कई योजनाएं हैं, जो 2024-25 तक की भी हैं । वर्तमान में अर्थव्यवस्था की विकास दर एवं जीडीपी वृद्धि दर कम हुई है। जिसे बढ़ाने के लिए औद्योगिक तथा सेवा क्षेत्र का विकास, रोजगार, बचत तथा निवेश में वृद्धि और निर्यात में तीव्र वृद्धि जरूरी है। बजट में इनके लिए कोई स्पष्ट रणनीति नहीं दिखती। ऐसे में अगले वित्तीय वर्ष के लिए अर्थव्यवस्था की विकास दर 6-6.5 प्रतिशत कैसे प्राप्त होगी।
वेतनभोगी वर्ग के लिए आयकर में दो प्रणालियों का प्रावधान है जिसका कोई खास औचित्य समझ नहीं आता। यह जरूर है कि सरकार कर संबंधी छूट और रियायतों को घटा रही है। इससे घरेलू बचत का प्रभाव सरकारी क्षेत्र में घटेगा जो रोजगार वृद्धि को प्रभावित कर सकता है। विभिन्न योजनाओं के लिए धन कहां-कहां से उपलब्ध होगा। इसकी स्पष्टता नहीं है, अर्थव्यवस्था की विकास दर बढ़ाने के लिए निवेश तथा बचत का बढ़ना जरूरी है। ऐसे में हर वह प्रयास किया जाना चाहिए जिससे बचत तथा निवेश प्रोत्साहित हो। बजट में इसका कोई रोडमैप नहीं है।
प्रो. संदीप कुमार दीक्षित, पूर्व अध्यक्ष अर्थशास्त्र विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय