फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gorakhpur News: टीबी का होता रहा इलाज, जांच में मिला फंगल इंफेक्शन

Thu, 20 Aug 2026 02:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
गोरखपुर। एम्स गोरखपुर के त्वचा रोग व वेनेरियोलॉजी और पैथोलॉजी विभाग के चिकित्सकों ने हिस्टोप्लास्मोसिस (फंगल इंफेक्शन) के दुर्लभ और असामान्य मामले की पहचान की है। शुरुआत में मरीज को टीबी मानकर इलाज दिया गया लेकिन त्वचा के घावों के बने रहने पर आगे की जांच में फैल चुके हिस्टोप्लास्मोसिस के साथ फेफड़ों की टीबी की पुष्टि हुई। यह मामला इंटरनेशनल जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।
विज्ञापन

एम्स के त्वचा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि 19 वर्षीय युवती में लंबे समय से बुखार, खांसी, वजन कम होने और पेट संबंधी शिकायतों के साथ त्वचा पर कई गांठ जैसे घाव दिख रहे थे। बायोप्सी में मामला सामने आया है। युवती को करीब एक साल से हल्का बुखार, रात में पसीना, काफी वजन कम होना और लगातार खांसी थी। पांच महीने से पेट में दर्द और भूख कम लगने की शिकायत भी थी।
दूसरे चिकित्सक ने उसे ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) मानकर एंटी ट्यूबरकुलर दवाएं शुरू की थी। इलाज शुरू होने के एक महीने बाद उसके शरीर पर उभरे हुए घाव दिखाई देने लगे। ये घाव धीरे-धीरे शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल गए और करीब तीन महीने बाद वह एम्स गोरखपुर पहुंची। एम्स में जांच के दौरान युवती काफी कमजोर मिली। उसका बॉडी मास इंडेक्स 15.4 था। त्वचा पर लाल रंग के गांठनुमा घाव दिखाई दिए जिनके बीच में मृत ऊतक जैसा हिस्सा था।
विज्ञापन

मरीज को दो सप्ताह तक लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन-बी दिया गया। साथ ही इट्राकोनाजोल और टीबी का उपचार जारी रखा गया। आठ सप्ताह के भीतर त्वचा के घावों में धीरे-धीरे कमी देखी गई। मरीज नियमित फॉलोअप में है और उपचार से संबंधित प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाए गए। चिकित्सकों के अनुसार हिस्टोप्लास्मोसिस के लक्षण कई बार टीबी और अन्य संक्रमणों से मिलते-जुलते हैं जिससे इसका निदान चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें