स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज-2 के तहत जिले में बने शौचालयों की शत प्रतिशत जियो टैगिंग (निर्मित शौचालयों का फोटो अपलोड करना) के लिए जिला पंचायतीराज अधिकारी (डीपीआरओ) हिमांशु शेखर ठाकुर ने 15 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया है।
उन्होंने चेताया कि इस समयावधि में जियो टैगिंग का काम पूरा नहीं हुआ तो संबंधित सहायक विकास अधिकारियों, खंड प्रेरकों पर कार्रवाई तय है। जिले में अभी 70 फीसदी शौचालयों का ही जियो टैगिंग हो सकी है। सबसे खराब प्रगति खोराबार ब्लॉक की है। वहां सिर्फ 52.21 फीसदी ही जिया टैगिंग हुई है। उधर, बैठक के तत्काल बाद खंड प्रेरकों ने अपने-अपने क्षेत्र के लाभार्थियों के घरों पर बन रहे या बन चुके शौचालयों का निरीक्षण किया।
डीपीआरओ बुधवार को विकास भवन सभागार में जिला परियोजना समन्वयक बच्चा सिंह और जिले के सभी ब्लॉकों में कार्यरत खंड प्रेरक के साथ स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज- 2 के तहत शौचालय निर्माण व जियो टैग की पंचायतवार समीक्षा कर रहे थे। निर्मित शौचालयों की फोटो अपलोडिंग की सुस्त रफ्तार पर डीपीआरओ ने संबंधित खंड प्रेरकों पर नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि 15 अप्रैल तक यदि शत प्रतिशत फोटो अपलोड करने का काम नहीं पूरा हुआ तो कार्रवाई तय है। डीपीआरओ ने बताया कि राज्य स्तर पर फोटो अपलोड का प्रतिशत 92.84 फीसदी है, जबकि जिले में महज 70.33 फीसदी है। सबसे खराब वाले ब्लॉक में खोराबार में 52.21 फीसदी, पिपरौली में 59.95, बांसगांव में 64.04, कौड़ीराम 65.76, खजनी 66.13, गोला 66.73, चरगांवा 67.21 फीसदी है।