गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा- क्रिएटिविटी पर रोक नहीं, रील में भाषा और मर्यादा जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में रील बनाने और फोटो खींचने के मामले यू-टर्न ले लिया है। विद्यार्थियों को रील और डिजिटल कंटेंट बनाने को लेकर प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की गई है। रविवार को प्रतिबंध लगाने के बाद सोमवार को ढील दे दी गई।
विश्वविद्यालय मीडिया सेल के प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सरकार ऑरेंज इकोनॉमी और क्रिएटिव इंडस्ट्री को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में विद्यार्थी रील, वीडियो या अन्य डिजिटल माध्यमों से अपनी प्रतिभा दिखाते हैं तो विश्वविद्यालय इसका स्वागत करता है। हालांकि कंटेंट बनाते समय भाषा संयमित, शालीन और मर्यादित होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी रील या वीडियो से समाज या राष्ट्र के प्रति विद्वेष, वैमनस्य या असम्मान की भावना नहीं पैदा होनी चाहिए। किसी व्यक्ति, संस्था या समुदाय के प्रति आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल से भी बचना होगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी बोध होना चाहिए। यह व्यवस्था रचनात्मकता पर रोक लगाने के लिए नहीं बल्कि परिसर की गरिमा, सुरक्षा और शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के लिए है।
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बाहरी लोगों को लेनी होगी अनुमति
डॉ. सिंह के मुताबिक विश्वविद्यालय परिसर में बाहरी व्यक्ति या समूह की ओर से रील, वीडियो या अन्य डिजिटल कंटेंट की शूटिंग के लिए प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।