राजस्व गांव सीहापार सहजनवां ब्लॉक की तीसरी सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। इस गांव की पिछली चकबंदी वर्ष 1966-67 में हुई थी। तहसील सूत्रों के मुताबिक, इस वर्ष के मध्य या अंत तक सीहापार में चकबंदी शुरू हो सकती है। नक्शा न होने से गांव का ड्रोन सर्वे नहीं हुआ है। ऐसे में बिना नक्शे के चकबंदी कैसे होगी, इस पर सभी मौन साधे हुए हैं।
जमीन विवाद के निपटारे में कई दिक्कत
तहसील में मूल सरकारी नक्शा न होने से कई तरह की दिक्कतें हैं। जमीन के कई मामले काफी विवादित स्थिति में हैं पर उनका स्थाई समाधान नहीं हो पा रहा है। ताल-पोखरों पर अतिक्रमण, ग्राम सभा की जमीन पर अवैध निर्माण, जमीनों का बंटवारा, सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा तथा अवैध निर्माण आदि ऐसी कई बड़ी समस्याएं हैं जिसमें मूल नक्शा का होना जरूरी है।
ग्राम पंचायत सीहापार के प्रधान प्रतिनिधि राहुल शुक्ला कहते हैं कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि पिछले 15 वर्षों से भी ज्यादा समय से गांव का मूल नक्शा नहीं है। लेखपाल कंप्यूटराइज्ड फोटोकॉपी से जैसे-तैसे काम चलाते हैं।
वर्ष 2010-15 के पंचवर्षीय कार्यकाल में तत्कालीन एसडीएम से पत्र लिखवाया गया था पर तहसील प्रशासन द्वारा ठोस पहल न करने की वजह से मूल नक्शा नहीं बन पाया। तहसील प्रशासन के लोग कहते हैं कि मूल नक्शा रुड़की से बनकर आएगा लेकिन कब और कैसे, इसका उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं है।
वहीं ग्राम हरपुर के प्रधान व पंचायतीराज विभाग के सलाहकार मदन मुरारी गुप्त कहते हैं कि उनके ग्राम पंचायत में कृषि भूमि कम है। तहसील में गांव का मूल नक्शा लंबे समय से नहीं है। जमीन से जुड़े मामलों में दिक्कत होती है।
सहजनवां एसडीएम सुरेश राय ने कहा कि मामले की जानकारी है। इस संबंध में कई बार पत्राचार किया जा चुका है। जैसा निर्देश प्राप्त होगा उसी अनुरूप कार्यवाही की जाएगी।