हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को अब बहुत ज्यादा पैदल नहीं चलना पड़ेगा। बजट में गोरखपुर के लिए इलेक्ट्रिक बसों का प्रावधान किया गया है। भारत हैवी इलेक्ट्रिक लिमिटेड (भेल) की ओर से 2.74 करोड़ की लागत से दो इलेक्ट्रिक बसें नगर निगम को मिलेंगी। जल्द ही इसकी आपूर्ति की उम्मीद है।
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हवाई जहाज से गोरखपुर आने और जाने वाले यात्रियों को बहुत परेशानी नहीं झेलनी होगी। एयरपोर्ट आने जाने वाले यात्रियों को चारु चंद्रपुरी कॉलोनी के पास बनाए गए पार्किंग स्थल पर अपनी गाड़ियां खड़ी करनी पड़ती है। इसके बाद पैदल एयरपोर्ट तक जाना पड़ता है। अब इन यात्रियों को पैदल नहीं जाना होगा। वहां तक जाने के लिए इलेक्ट्रक बसें उपलब्ध होगी।
नगर निगम चीफ इंजीनियर सुरेश चंद ने कहा कि एयरपोर्ट पर दो इलेक्ट्रिक बसों की खरीद होनी है। भेल से 2.74 करोड़ की लागत से इन बसों की आपूर्ति होगी। बजट में प्रावधान होने से लोगों को जल्द इसकी सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी।
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शहर में दो रूटों पर चलेंगी इलेक्ट्रिक बसें
जल्द ही शहर में इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी। नगरीय परिवहन प्रणाली के तहत कैबिनेट ने इसके लिए मंजूरी दे दी है। वहीं बजट में इसके लिए प्रावधान भी कर दिया गया है। नगर निगम ने न सिर्फ इसके लिए रूट तय कर लिया है बल्कि चार्जिंग स्टेशन के लिए जगह भी चिह्नित कर ली गई है। शासन की ओर से 25 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराई जाएंगी।
इलेक्ट्रिक बसों के लिए निर्धारित दो रूटों पर 12-13 बसें सुबह 7 बजे से रात्रि 9 बजे तक चलाई जाएंगी। दोनों रूट पर बस स्टॉपेज का चयन भी कर लिया गया है। जिस स्टॉपेज पर बस शेल्टर नहीं हैं, वहां पर शेल्टर बनवाये जाएंगे। अगले चरण में बसों की संख्या में बढ़ोत्तरी की जाएगी।
रानीडीहा- काली मंदिर- झुंगिया (रूट-1)
रानीडीहा तिराहा, एमएमटीयू, कूड़ाघाट, गुरुंग तिराहा, आरकेबीके, मोहद्दीपुर चौराहा, विश्वविद्यालय चौराहा, रोडवेज बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, यातायात तिराहा, काली मंदिर, पटेल चौराहा, धर्मशाला फ्लाईओवर, असुरन चौक, एचएन सिंह चौराहा, राप्तीनगर चौराहा, खजांची चौराहा, मुगलहा पेट्रोल पंप, मेडिकल कालेज, झुंगिया गेट, झुंगिया चौराहा तक।
महेसरा में स्थापित होगा इलेक्ट्रिक बसों का चार्जिंग स्टेशन
महेसरा में इलेक्ट्रिक बसों का चार्जिंग स्टेशन बनेगा। करीब एक एकड़ बनने वाले इस चार्जिंग स्टेशन के लिए करीब 6.25 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा चुका है। नगर निगम ने इस स्टेशन को तैयार करने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्थान कंस्ट्रक्शन एवं डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) को दी गई है।